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Kohar
saath men kuchh ji.e ham jo lamhe
saath men kuchh ji.e ham jo lamhe | साथ में कुछ जिए हम जो लम्हें
- Kohar
साथ
में
कुछ
जिए
हम
जो
लम्हें
याद
कर
अब
उन्हें
मर
रहा
हूँ
- Kohar
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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गठरी
सिर
पे
ग़मों
की
लिए
फिर
चले
मुस्कुराते
हुए
Kohar
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मैं
पहले
भी
तो
तुम
से
ये
कह
चुका
हूँ
मुश्किल
से
शब-ए-हिज्र
को
सह
चुका
हूँ
कभी
नींव
पक्की
मोहब्बत
की
थी
जिसकी
वही
मैं
किला
हूँ
जो
अब
ढ़ह
चुका
हूँ
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Kohar
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हौसला
रख,
देख
हंस
कर
छोड़
ग़म
को,
जी
ख़ुशी
से
Kohar
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ज़ख़्म
अपनों
से
मिले
है
ग़ैर
पूछे
हाल
मेरा
Kohar
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कुछ
इस
तरह
मुझ
से
गुजर
छू
कर
मुझे
ना
हो
ख़बर
कोई
सीधे
दिल
पर
लगे
कुछ
बात
कह
कर
फिर
मुकर
जब
से
गया
है
छोड़
कर
ग़म
से
रहा
हूँ
तर
बतर
दिल
के
करीबी
खो
कई
है
हर
तरफ़
ढूँढे
नजर
गिनती
की
हर
सांस
पर
अब
हो
रही
है
रहगुज़र
"कोहर"
सभी
रास्ते
अलग
हर
इक
करे
अपना
सफ़र
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Kohar
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