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Kavi bhanu pratap mishra
dard-e-dil ki sab kahaanii kah rahi
dard-e-dil ki sab kahaanii kah rahi | दर्द-ए-दिल की सब कहानी कह रही
- Kavi bhanu pratap mishra
दर्द-ए-दिल
की
सब
कहानी
कह
रही
नाव
दरिया
की
रवानी
कह
रही
वो
बिछड़
के
ख़ुश
नहीं
है
आज
भी
मेरी
दी
हर
इक
निशानी
कह
रही
- Kavi bhanu pratap mishra
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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सब
का
ख़ुशी
से
फ़ासला
एक
क़दम
है
हर
घर
में
बस
एक
ही
कमरा
कम
है
Javed Akhtar
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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लिखने
को
तो
लिख
दूॅं
लेकिन
ज़ाया'
भी
जा
सकता
है
दर्द
मुहब्बत
का
लिख
दूॅं
तो
गाया
भी
जा
सकता
है
बैठो
मेरे
पास
रहो
तुम
इतना
तो
उपकार
करो
तुम
जो
उठकर
चल
दोगे
तो
साया
भी
जा
सकता
है
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Kavi bhanu pratap mishra
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शाम
होते
ही
शजर
सब
भर
गए
पंछी
सब
के
सब
ही
अपने
घर
गए
थी
मोहब्बत
आपसे
कुछ
इस
तरह
आपसे
बिछड़े
ग़मों
से
भर
गए
चारा-गर
ने
नब्ज़
थामी
और
फिर
आपके
छूते
ही
दुख
सब
हर
गए
प्यार
करना
छोड़
दो
अब
इस
क़दर
अब
बची
बस
लाश
है
हम
मर
गए
आस
बस
इतनी
कि
वो
मिल
जाए
फिर
ढूँढते
उसको
तभी
हर
दर
गए
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Kavi bhanu pratap mishra
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