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Kavi bhanu pratap mishra
likhne ko to likh doon lekin ज़ाया' bhi ja saka hai
likhne ko to likh doon lekin ज़ाया' bhi ja saka hai | लिखने को तो लिख दूॅं लेकिन ज़ाया' भी जा सकता है
- Kavi bhanu pratap mishra
लिखने
को
तो
लिख
दूॅं
लेकिन
ज़ाया'
भी
जा
सकता
है
दर्द
मुहब्बत
का
लिख
दूॅं
तो
गाया
भी
जा
सकता
है
बैठो
मेरे
पास
रहो
तुम
इतना
तो
उपकार
करो
तुम
जो
उठकर
चल
दोगे
तो
साया
भी
जा
सकता
है
- Kavi bhanu pratap mishra
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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चारासाज़ो
मिरा
इलाज
करो
आज
कुछ
दर्द
में
कमी
सी
है
Azhar Nawaz
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हम
आज
राह-ए-तमन्ना
में
जी
को
हार
आए
न
दर्द-ओ-ग़म
का
भरोसा
रहा
न
दुनिया
का
Waheed Quraishi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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शाम
होते
ही
शजर
सब
भर
गए
पंछी
सब
के
सब
ही
अपने
घर
गए
थी
मोहब्बत
आपसे
कुछ
इस
तरह
आपसे
बिछड़े
ग़मों
से
भर
गए
चारा-गर
ने
नब्ज़
थामी
और
फिर
आपके
छूते
ही
दुख
सब
हर
गए
प्यार
करना
छोड़
दो
अब
इस
क़दर
अब
बची
बस
लाश
है
हम
मर
गए
आस
बस
इतनी
कि
वो
मिल
जाए
फिर
ढूँढते
उसको
तभी
हर
दर
गए
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Kavi bhanu pratap mishra
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दर्द-ए-दिल
की
सब
कहानी
कह
रही
नाव
दरिया
की
रवानी
कह
रही
वो
बिछड़
के
ख़ुश
नहीं
है
आज
भी
मेरी
दी
हर
इक
निशानी
कह
रही
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Kavi bhanu pratap mishra
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