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Kartik tripathi
qaateil-e-amad ko kyun dosh de rahe ho tum
qaateil-e-amad ko kyun dosh de rahe ho tum | क़ातिल-ए-अमद को क्यूँँ दोष दे रहे हो तुम
- Kartik tripathi
क़ातिल-ए-अमद
को
क्यूँँ
दोष
दे
रहे
हो
तुम
मेरे
यार
उसकी
तो
शौक-ए-क़त्ल
आदत
है
- Kartik tripathi
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
Mehshar Afridi
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मज़हब
से
मेरे
क्या
तुझे
मेरा
दयार
और
मैं
और
यार
और
मिरा
कारोबार
और
Meer Taqi Meer
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फ़िराक़-ए-यार
ने
बेचैन
मुझ
को
रात
भर
रक्खा
कभी
तकिया
इधर
रक्खा
कभी
तकिया
उधर
रक्खा
Ameer Minai
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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ग़रज़
कि
काट
दिए
ज़िंदगी
के
दिन
ऐ
दोस्त
वो
तेरी
याद
में
हों
या
तुझे
भुलाने
में
Firaq Gorakhpuri
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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हम
को
यारों
ने
याद
भी
न
रखा
'जौन'
यारों
के
यार
थे
हम
तो
Jaun Elia
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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दर्द
क्या
है
मुझको
तुम
सेे
मैं
कह
नहीं
पाया
हाथ
थाम
कर
तुमने
भी
कभी
नहीं
पूछा
Kartik tripathi
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यार
तू
भी
मानता
है
हाथ
की
तहरीर
में
मैं
समझता
था
कि
हम
दो
जिस्म
और
इक
जान
है
Kartik tripathi
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मैं
समझता
था
सरल
है
ज़िन्दगी
बस
फ़िल्म
जितनी
डर
गया
मैं
ज़िन्दगी
की
फिर
हक़ीक़त
को
समझ
कर
ऐंठ
से
आया
था
बाज़ार-ए-मुहब्बत
में
कभी
जो
रह
गया
वो
लड़का
जानाँ
ज़ुल्फ़
में
तेरी
उलझ
कर
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Kartik tripathi
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हमें
ता-उम्र
न
आया
या-इलाही
फ़न
मुहब्बत
का
किसी
को
ख़ूब
रोए
और
किसी
को
फिर
रुलाया
ख़ूब
Kartik tripathi
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वास्ते
तेरे
ही
मैं
कर
रहा
यहाँ
सब
कुछ
बैर
फिर
यूँँ
कुछ
तुझ
सेे
बात
भी
नहीं
करनी
Kartik tripathi
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