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Aashish kargeti 'Kash'
bhool ja jo hua tha kal ghar chal
bhool ja jo hua tha kal ghar chal | भूल जा जो हुआ था कल घर चल
- Aashish kargeti 'Kash'
भूल
जा
जो
हुआ
था
कल
घर
चल
जान
इस
सोच
को
बदल
घर
चल
- Aashish kargeti 'Kash'
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काश
तू
सब
याद
रखती
और
मैं
सब
भूल
जाता
हाँ
मगर
ऐसा
न
होना
भी
तो
क़िस्मत
थी
हमारी
shaan manral
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हमें
भी
आज
ही
करना
था
इंतिज़ार
उस
का
उसे
भी
आज
ही
सब
वादे
भूल
जाने
थे
Aashufta Changezi
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अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
Salman Zafar
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यहाँँ
अनजान
हो
तुम
भी
यहाँँ
अनजान
हैं
हम
भी
किसी
की
जान
हो
तुम
भी
किसी
की
जान
हैं
हम
भी
बड़े
नादान
हो
तुम
भी
बड़े
नादान
हैं
हम
भी
अतः
वीरान
हो
तुम
भी
अतः
वीरान
हैं
हम
भी
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Vivek Vistar
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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मैं
भूल
जाऊँ
तुम्हें
अब
यही
मुनासिब
है
मगर
भुलाना
भी
चाहूँ
तो
किस
तरह
भूलूँ
Javed Akhtar
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जमाना
भूल
पायेगा
नहीं
अपनी
मुहब्बत
छपेंगे
क्लास
दसवीं
में
सभी
किस्से
हमारे
Shubham Seth
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हमने
ही
लौटने
का
इरादा
नहीं
किया
उसने
भी
भूल
जाने
का
वा'दा
नहीं
किया
Parveen Shakir
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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लगा
था
की
उड़ा
देगी
मुझे
हवा
की
धार
कितनी
तेज़
थी
Aashish kargeti 'Kash'
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या
तो
थम
जाता
या
फिर
कुछ
शब
तक
बहता
उसकी
आँखों
से
पानी
भी
कब
तक
बहता
Aashish kargeti 'Kash'
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मुझ
को
दिलबर
दिन-भर
सुन
कुछ
अच्छी
बातें
कर
सुन
हर
धड़कन
पर
नाम
तिरा
सीने
पर
सर
रख
कर
सुन
फट
से
हो
जा
मेरी
अब
ग़ौर
से
मेरा
मंतर
सुन
जो
बाहर
है
रहने
दे
जो
तेरे
है
भीतर
सुन
दूर
के
ढोल
लगे
अच्छे
पास
से
इनको
आ
कर
सुन
क्या
आऊँगा
दिन
में
याद
जाना
है
कल
दफ़्तर
सुन
दिल
तो
सारे
झूठे
है
क्या
कहता
ये
पत्थर
सुन
तेरे
चक्कर
में
'आशीष'
सालों
भटका
दर
दर
सुन
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Aashish kargeti 'Kash'
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आख़िरी
आशिक़ी
मय-कशी
रह
गई
ज़िंदगी
भर
में
जब
तीरगी
रह
गई
है
मिला
कुछ
घड़ी
का
सुकूँ
और
फिर
कुछ
घड़ी
पास
में
आख़िरी
रह
गई
हो
गया
ख़त्म
सब
जो
भी
था
दरमियाँ
जब
फ़क़त
दरमियाँ
बे-रुख़ी
रह
गई
ख़ामुशी
से
अलग
हो
गए
वक़्त
पर
वक़्त
की
धार
में
आशिक़ी
रह
गई
हश्र
ये
पेड़
को
काटने
से
हुआ
ये
ज़मीं
बीच
से
खोखली
रह
गई
तू
मिरी
ज़िंदगी
बन
गई
है
मगर
जो
मिरा
ख़्वाब
थी
शा'इरी
रह
गई
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Aashish kargeti 'Kash'
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तेज़
आंधी
में
जज्बे
नहीं
बच
सकेंगे
ये
तना
शाख
पत्ते
नहीं
बच
सकेंगे
Aashish kargeti 'Kash'
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