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Aashish kargeti 'Kash'
laga tha ki uda degi mujhe
laga tha ki uda degi mujhe | लगा था की उड़ा देगी मुझे
- Aashish kargeti 'Kash'
लगा
था
की
उड़ा
देगी
मुझे
हवा
की
धार
कितनी
तेज़
थी
- Aashish kargeti 'Kash'
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क़सम
देता
है
बच्चों
की,
बहाने
से
बुलाता
है
धुआँ
चिमनी
का
हमको
कारख़ाने
से
बुलाता
है
Munawwar Rana
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गुलाब
टहनी
से
टूटा
ज़मीन
पर
न
गिरा
करिश्में
तेज़
हवा
के
समझ
से
बाहर
हैं
Shahryar
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बेहतर
है
मेरे
जाम
में
अब
ज़हर
मिला
दो
तुम
यूँँ
तो
मेरी
प्यास
को
कम
कर
नहीं
सकते
Saad Zaigham
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इन
चराग़ों
में
तेल
ही
कम
था
क्यूँँ
गिला
फिर
हमें
हवा
से
रहे
Javed Akhtar
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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दिया
बुझ
जाए
तो
अचरज
नहीं
है
हवा
का
रुख
बदलता
जा
रहा
है
Atul K Rai
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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हर
ख़ुशी
मुस्कुरा
के
कहती
है
दर्द
बनकर
छुपे
हुए
हो
तुम
आज
आब-ओ-हवा
में
ख़ुश्बू
है
लग
रहा
है
घुले
हुए
हो
तुम
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Ritesh Rajwada
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कमरे
में
सिगरेटों
का
धुआँ
और
तेरी
महक
जैसे
शदीद
धुँध
में
बाग़ों
की
सैर
हो
Umair Najmi
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इसे
तो
वक़्त
की
आब-ओ-हवा
ही
ठीक
कर
देगी
मियाँ
नासूर
होते
ज़ख़्म
सहलाया
नहीं
करते
shaan manral
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उस
पे
इतना
यक़ीं
किया
मैंने
आसमाँ
को
ज़मीं
किया
मैंने
Aashish kargeti 'Kash'
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तुम
कहते
हो
ऐसी
वैसी
आती
है
देखो
मुझ
से
ख़ुशबू
कैसी
आती
है
Aashish kargeti 'Kash'
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मेरी
तस्वीर
में
से
मैं
ही
हो
जाऊंगा
गुम
मेरी
तस्वीर
में
कोई
तलाशे
गर
उसे
Aashish kargeti 'Kash'
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मुझ
को
दिलबर
दिन-भर
सुन
कुछ
अच्छी
बातें
कर
सुन
हर
धड़कन
पर
नाम
तिरा
सीने
पर
सर
रख
कर
सुन
फट
से
हो
जा
मेरी
अब
ग़ौर
से
मेरा
मंतर
सुन
जो
बाहर
है
रहने
दे
जो
तेरे
है
भीतर
सुन
दूर
के
ढोल
लगे
अच्छे
पास
से
इनको
आ
कर
सुन
क्या
आऊँगा
दिन
में
याद
जाना
है
कल
दफ़्तर
सुन
दिल
तो
सारे
झूठे
है
क्या
कहता
ये
पत्थर
सुन
तेरे
चक्कर
में
'आशीष'
सालों
भटका
दर
दर
सुन
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Aashish kargeti 'Kash'
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कौन
आएगा
इस
उजड़ी
बस्ती
में
'आशीष'
किस
से
कर
सकते
है
हम
अपने
दुख
साझे
Aashish kargeti 'Kash'
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