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Aashish kargeti 'Kash'
jungle ki aag bujha sakte ho
jungle ki aag bujha sakte ho | जंगल की आग बुझा सकते हो?
- Aashish kargeti 'Kash'
जंगल
की
आग
बुझा
सकते
हो?
बिन
पानी
के
कर
क्या
सकते
हो?
मैं
इक
टूटा
फैंका
पुतला
हूँ
अपने
घर
ले
कर
जा
सकते
हो?
बस
तुम्हें
ही
तो
है
हक
इतना
तुम
मुझको
हाथ
लगा
सकते
हो
- Aashish kargeti 'Kash'
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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सब
दुखों
का
ये
समुंदर
पार
होगा
जब,
सभी
आफ़तों
के
पत्थरों
पर
नाम
होगा
राम
का
Shoonya Shrey
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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नदी
आँखें
भँवर
ज़ुल्फ़ें
कहाँ
तैरूँ
कहाँ
डूबूँ
कि
तेरे
शहर
में
सब
की
अदाएँ
एक
जैसी
हैं
Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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ख़ास,
जिगरी,
मान
ले
मतलूब
से
हिज्र
'कश'
तुझे
मंजूर
है?
महबूब
से
हिज्र
Aashish kargeti 'Kash'
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दम
तेरी
इस
बात
में
है
क्या
?
सूखापन
बरसात
में
है
क्या
?
इश्क़
मुहब्बत
ज़ाहिर
करना
बस
केवल
अस्वात
में
है
क्या
?
पल
पल
मुझ
को
जो
खाते
हैं
ऐसा
उन
लम्हात
में
है
क्या
?
दिल
की
धड़कन
रुक
सकती
है
ऐसा
कुछ
सौगात
में
है
क्या
?
रुख़्सत
तुझ
को
होते
देखे
'आशू'
इन
हालात
में
है
क्या
?
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Aashish kargeti 'Kash'
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ज़ख़्म
पर
यूँँ
नमक
लगा
कर
तुम
दर्द
को
क्यूँ
मेरे
बढ़ाते
हो
Aashish kargeti 'Kash'
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शाम
तो
रात
से
सियानी
है
शाम
को
रात
की
तलब
है
क्यूँ
?
Aashish kargeti 'Kash'
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हर
पेड़
की
जड़
खोखली
है
देख
लो
जंगल
ज़बाँ
भी
तोतली
है
देख
लो
तुम
कह
रहे
थे
घर
सड़क
के
पास
है
पर
तेरे
घर
को
तो
गली
है
देख
लो
बाहर
निकलते
वक़्त
तुम
बस
एक
बार
बाहर
हवा
कैसी
चली
है
देख
लो
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Aashish kargeti 'Kash'
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