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Aashish kargeti 'Kash'
khaas jigari maan le matlab se hijr
khaas jigari maan le matlab se hijr | ख़ास, जिगरी, मान ले मतलूब से हिज्र
- Aashish kargeti 'Kash'
ख़ास,
जिगरी,
मान
ले
मतलूब
से
हिज्र
'कश'
तुझे
मंजूर
है?
महबूब
से
हिज्र
- Aashish kargeti 'Kash'
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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क्यूँ
हिज्र
के
सभी
को
क़िस्से
सुना
रहे
हो
ग़म
बेचते
हो
सबको
ग़म
की
दुकान
हो
तुम
Amaan Pathan
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उसी
की
आस
ने
सँभाल
रक्खा
हिज्र
में
मुझे
वही
जो
अपनी
ज़ुल्फ़ें
तक
नहीं
सँवार
पाती
है
Harsh saxena
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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ख़ुदा
करे
कि
तिरी
उम्र
में
गिने
जाएँ
वो
दिन
जो
हम
ने
तिरे
हिज्र
में
गुज़ारे
थे
Ahmad Nadeem Qasmi
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इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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या
तो
थम
जाता
या
फिर
कुछ
शब
तक
बहता
उसकी
आँखों
से
पानी
भी
कब
तक
बहता
Aashish kargeti 'Kash'
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तुम
कहते
हो
ऐसी
वैसी
आती
है
देखो
मुझ
से
ख़ुशबू
कैसी
आती
है
Aashish kargeti 'Kash'
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हुस्न
के
सर
पे
क्या
इश्क़
में
खेलना
इश्क़
के
सर
पे
तुम
हुस्न
जीते
मेरा
Aashish kargeti 'Kash'
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दम
तेरी
इस
बात
में
है
क्या
?
सूखापन
बरसात
में
है
क्या
?
इश्क़
मुहब्बत
ज़ाहिर
करना
बस
केवल
अस्वात
में
है
क्या
?
पल
पल
मुझ
को
जो
खाते
हैं
ऐसा
उन
लम्हात
में
है
क्या
?
दिल
की
धड़कन
रुक
सकती
है
ऐसा
कुछ
सौगात
में
है
क्या
?
रुख़्सत
तुझ
को
होते
देखे
'आशू'
इन
हालात
में
है
क्या
?
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Aashish kargeti 'Kash'
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वो
किस
जगह
पे
छोड़
जाए
क्या
ख़बर
इस
बात
से
बस
वो
ही
रहता
बा-ख़बर
हम
ने
तबह
कर
ली
है
अपनी
ज़िंदगी
उसकी
गली
में
जा
के
फैलाना
ख़बर
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