kisi bhi taur ye hadd-e-nazar ke bas men nahin | किसी भी तौर ये हद्द-ए-नज़र के बस में नहीं

  - Kaif Uddin Khan
किसीभीतौरयेहद्द-ए-नज़रकेबसमेंनहीं
तुम्हाराहुस्नमेरेक़ैद-ए-दस्तरसमेंनहीं
मैंचाहताहूँमोहब्बतकोतर्ककरदूँअब
मेरेक़रीबकोईमसअलाहवसमेंनहीं
येज़िंदगीकीमसर्रतभीएकधोकाहै
सुकूनमौतसेआएगाजोनफ़समेंनहीं
यूँँअक़्ल-ओ-फ़ह्मसेफ़िक्र-ए-सवालक्याकरना
जवाबहैकोईऐसाजोपेश-ओ-पसमेंनहीं
अजीबलुत्फ़-ए-मसर्रतहैयेअसीरीभी
वोइज़्तिराबमेंरहतेहैंजोक़फ़समेंनहीं
तुम्हेंयेशौक़-ए-ख़यालातमारडालेगा
अगरजुनून-ए-दरूँआगहीकेबसमेंनहीं
मेरेयक़ीनकोहासिलनहींकेयेदुनिया
सराब-ओ-ख़्वाबहैजोमेरेदस्तरसमेंनहीं
  - Kaif Uddin Khan
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