निगाह-ए-शौक़कोयेक़ुर्बहासिलहोरहाहै
तेराचहरामेरीआँखोंकेक़ाबिलहोरहाहै
मुझेदरियासेनिस्बतइसक़दरहैपूछिएमत
जिसेमैंछूरहाहूँवोभीसाहिलहोरहाहै
हद-ए-अफ़लाक़सेआगेनहींरस्तामुहय्या
मेरीपरवाज़मेंइकशक़्सहाइलहोरहाहै
निकलकरवस्फ़बहतेहैंतेरीआँखोंसेऐसे
तूजिसकोदेखताहैवोभीक़ातिलहोरहाहै
तुझेछूनाख़सारेकेसिवाकुछभीनहींअब
तुझेछूनेसेपत्थरजोमेरादिलहोरहाहै
शरीक-ए-मर्गतोहूँपरक़ज़ासेबेख़बरहूँ
वोरस्ताहूँमैंजोख़ुदअपनीमंज़िलहोरहाहै