hijr men mubtala nahin hona | हिज्र में मुब्तला नहीं होना

  - Kaif Uddin Khan
हिज्रमेंमुब्तलानहींहोना
अबहमेंग़म-ज़दानहींहोना
हिज्रकेबादमुतमइनहैंयूँँ
जैसेअबकुछबुरानहींहोना
यूँँतोसहराकीधूलहूँबेशक
परमुझेज़ेर-ए-पानहींहोना
शौक़-ए-दीदारमरगयामेरा
औरउसकोख़ुदानहींहोना
ख़्वाबआँखोंसेकरगयाहिजरत
नींदकोपरख़फ़ानहींहोना
तूफ़क़तएकबारमिलतीहै
ज़िन्दगी!मसअलानहींहोना
दाग़-ए-हस्तीकोदेखकरतयहै
ज़ख़्म-ए-जाँअबहरानहींहोना
अबयेकश्तीतेरेहवालेहै
अबमुझेना-ख़ुदानहींहोना
चाहताहूँमुझेसुनाईदे
शोरजिसकोसदानहींहोना
पुरहैमेरावुजूदवहशतसे
इसबदनकोख़लानहींहोना
  - Kaif Uddin Khan
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