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Kaafir
e'tibaaran ye takalluf kar ga.e ham
e'tibaaran ye takalluf kar ga.e ham | ए'तिबारन ये तकल्लुफ़ कर गए हम
- Kaafir
ए'तिबारन
ये
तकल्लुफ़
कर
गए
हम
बे-तकल्लुफ़
हो
किसी
पे
मर
गए
हम
- Kaafir
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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वहाँ
पहले
ही
आवाज़ें
बहुत
थीं
सो
मैं
ने
चुप
कराया
ख़ामुशी
को
Abhishek shukla
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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भाई
बहनों
की
मोहब्बत
का
नशा
मत
पूछिए
बे-तकल्लुफ़
हो
गए
तो
गुदगुदी
तक
आ
गए
Iftikhar Falak Kazmi
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ज़िन्दगी
रुख़
पर
जो
तेरे
छाई
है
यह
ख़ामुशी
आ
इसे
मैं
चीर
दूँ
पाज़ेब
की
झंकार
से
Kiran K
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तुम
इस
ख़मोश
तबीअत
पे
तंज़
मत
करना
वो
सोचता
है
बहुत
और
बोलता
कम
है
Nawaz Deobandi
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मेरे
मिज़ाज
की
उसको
ख़बर
नहीं
रही
है
ये
बात
मेरे
गले
से
उतर
नहीं
रही
है
ये
रोने-धोने
का
नाटक
तवील
मत
कर
अब
बिछड़
भी
जाए
तू
मुझ
सेे
तो
मर
नहीं
रही
है
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Ashutosh Vdyarthi
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फिर
ख़मोशी
ने
साज़
छेड़ा
है
फिर
ख़यालात
ने
ली
अँगड़ाई
Javed Akhtar
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बर्बाद
होते
देख
ख़ुद
को
थक
गया
वक़्फ़ा
करें
कुछ
दिन
परेशानी
सभी
Kaafir
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कब
तक
तरब
एजाज़
हो
नग़मात
से
कुछ
बे-दिली
से
भी
हमें
आराम
है
Kaafir
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मुंतज़िर
की
बे-क़रारी
लौट
आई
अश्क-बारी
शब-गुज़ारी
लौट
आई
Kaafir
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दिल
बद-चलन
बेज़ार
जो
बद-नाम
है
ये
मयकशी
सब
इश्क़
का
अंजाम
है
Kaafir
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मरहला
मानो
वफ़ा
की
आम
दिक्कत
इश्क़-बाज़ों
का
फ़क़त
अंजाम
दिक्कत
Kaafir
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