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Meem Alif Shaz
woh jo shakhs hai use to bas mukarna aata hai
woh jo shakhs hai use to bas mukarna aata hai | वो जो शख़्स है उसे तो बस मुकरना आता है
- Meem Alif Shaz
वो
जो
शख़्स
है
उसे
तो
बस
मुकरना
आता
है
हर
किसी
के
ज़ख़्म
में
नमक
भी
भरना
आता
है
बार
बार
पैसे
लेता
है
किसी
बहाने
से
फिर
महीनों
तक
ख़मोशी
से
गुज़रना
आता
है
- Meem Alif Shaz
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तेरे
चुप
रहने
से
हर
पौधा
सूख
गया
है
तुझको
मालूम
नहीं
पौधों
का
पानी
है
तू
Kabir Altamash
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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शब-ए-हिज्रां
बुझा
बैठी
हूँ
मैं
सारे
सितारे
पर
कोई
फ़ानूस
रौशन
है
ख़मोशी
से
मेरे
अंदर
Kiran K
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तेरा
चुप
रहना
मेरे
ज़ेहन
में
क्या
बैठ
गया
इतनी
आवाज़ें
तुझे
दीं
कि
गला
बैठ
गया
Tehzeeb Hafi
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चुप
रहते
हैं
चुप
रहने
दो
राज़
बताओ
खोले
क्या
बात
वफ़ा
की
तुम
करती
हो
बोलो
हम
कुछ
बोले
क्या
उल्फ़त
तो
अफ़साना
है
तुम
करती
खूब
सियासत
हो
हम
भी
हैं
मक़बूल
बहुत
अब
बोल
किसी
के
होलें
क्या
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Anand Raj Singh
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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जिन्हें
सब
लोग
गूँगा
बोलते
हैं
मेरे
आगे
वो
ऊँचा
बोलते
हैं
ख़मोशी
बोलने
वालों
की
सफ़
में
हमीं
सब
सेे
ज़ियादा
बोलते
हैं
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Ashutosh Vdyarthi
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मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
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क़स
में,
वादे,
दरवाज़े
तो
ठीक
हैं
पर
ख़ामोशी
को
तोड़
नहीं
सकता
हूँ
मैं
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Tanoj Dadhich
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चाँद
तारे
फ़लक
पे
चमकने
लगे
यादों
के
चेहरे
फिर
से
झलकने
लगे
जब
तिरी
उँगलियों
ने
छुआ
जिस्म
को
मिट्टी
के
अंग
सारे
महकने
लगे
धूप
ने
इस
तरह
से
जलाया
बदन
सारे
मज़दूर
सर
को
पटकने
लगे
जब
बड़ों
की
न
मानी
कभी
कोई
बात
बच्चे
मंज़िल
से
अपनी
भटकने
लगे
जब
सड़क
पे
निकल
के
वो
आई
परी
बूढ़ों
के
दिल
भी
धक
धक
धड़कने
लगे
देख
कर
मलबे
के
नीचे
मासूमों
को
लोगों
के
आँसू
टप
टप
टपकने
लगे
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Meem Alif Shaz
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इश्क़
की
मेरे
थोड़ी
कमाई
तो
दे
होंटों
से
छूने
की
भी
रसाई
तो
दे
मैं
तुझे
भूलने
लग
गया
हूँ
अगर
मेरे
इस
हौसले
की
बधाई
तो
दे
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Meem Alif Shaz
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दोस्ती
में
जफ़ा
नहीं
अच्छी
ज़ख़्म
दे
के
दवा
नहीं
अच्छी
ज़िन्दगी
जब
ये
टूट
ही
जाए
इस
की
ऐसी
अदा
नहीं
अच्छी
डूबने
ही
लगे
अगर
कश्ती
ना-ख़ुदास
दु'आ
नहीं
अच्छी
जो
दिया
से
करे
मोहब्बत
भी
घर
में
ऐसी
हवा
नहीं
अच्छी
बच्चे
भी
इक
भंवर
में
फँस
जाए
ख़ुद
को
इतनी
सज़ा
नहीं
अच्छी
पाँव
से
काँटा
जब
निकल
जाए
ज़िन्दगी
से
दग़ा
नहीं
अच्छी
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Meem Alif Shaz
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थक
जाते
हो
तुम
इश्क़
करते-करते?
अच्छा,
फिर
तुम
कुछ
भी
नहीं
कर
सकते
Meem Alif Shaz
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घर
से
बाहर
जाने
में
तो
ख़तरा
है
जब
तक
घर
में
हैं
शिकवे
जला
देते
हैं
Meem Alif Shaz
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