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Meem Alif Shaz
teri aankhoñ ko dekhooñ ya in se baatein karoon
teri aankhoñ ko dekhooñ ya in se baatein karoon | तेरी आँखों को देखूँ या इन से बातें करूँँ
- Meem Alif Shaz
तेरी
आँखों
को
देखूँ
या
इन
से
बातें
करूँँ
एक
हसीं
मंज़र
है
एक
हसीं
लहजा
भी
है
- Meem Alif Shaz
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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बात
ये
है
कि
आदमी
शाइर
या
तो
होता
है
या
नहीं
होता
Mahboob Khizan
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मुझे
इक
बात
कहनी
थी
अगर
मुझ
को
इज़ाज़त
हो
तुम्हीं
मेरी
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
Shadab Asghar
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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बूढ़ी
बोझल
सूखी
आँखें
देख
रही
हैं
हैरत
से
कच्ची
उम्र
के
लड़कों
ने
कुछ
ऐसी
बातें
लिक्खी
हैं
Shadab Javed
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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कुछ
लोगों
की
ख़ातिर
मिरी
पहचान
बदली
है
मगर
अब
भी
मोहब्बत
वाले
हिंदुस्तान
कहते
हैं
मुझे
Meem Alif Shaz
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मैं
इक
फूल
भी
हूँ
मैं
तो
इक
पथ्थर
भी
हूँ
जो
करना
है
तेरे
हाथों
को
करना
है
Meem Alif Shaz
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अगर
हम
देख
लें
तुझ
को
यूँँ
जी
भर
के
हमारी
आँखों
की
मज़दूरी
हो
जाए
Meem Alif Shaz
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मुसलसल
कोई
घाइल
तो
नहीं
है
मगर
जो
आज
है
कल
तो
नहीं
है
तुझे
गर
सब
बुरा
कहते
हैं
तो
सोच
ज़माना
यूँँही
पागल
तो
नहीं
है
मिला
है
ग़म
तो
थोड़ा
सब्र
भी
कर
अँधेरा
यह
मुसलसल
तो
नहीं
है
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Meem Alif Shaz
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यूँँही
नहीं
हूँ
अब
मैं
भी
इतना
तन्हा
झूठों
की
रिश्वत
ठुकराई
है
मैं
ने
Meem Alif Shaz
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