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Meem Alif Shaz
musalsal koi ghaayal to nahin hai
musalsal koi ghaayal to nahin hai | मुसलसल कोई घाइल तो नहीं है
- Meem Alif Shaz
मुसलसल
कोई
घाइल
तो
नहीं
है
मगर
जो
आज
है
कल
तो
नहीं
है
तुझे
गर
सब
बुरा
कहते
हैं
तो
सोच
ज़माना
यूँँही
पागल
तो
नहीं
है
मिला
है
ग़म
तो
थोड़ा
सब्र
भी
कर
अँधेरा
यह
मुसलसल
तो
नहीं
है
- Meem Alif Shaz
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारी
ख़ानदानी
रस्म
रस्म-ए-बेवफ़ाई
है
हमीं
पागल
थे
जो
तुम
पर
भरोसा
कर
लिया
हमने
Shajar Abbas
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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कोई
पागल
ही
मोहब्बत
से
नवाज़ेगा
मुझे
आप
तो
ख़ैर
समझदार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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रक़ीबों
की
शरारत
तुम
को
क्या
मालूम
हमारी
हर
मुसीबत
तुम
को
क्या
मालूम
न
देखो
इन
गरीबों
को
हिक़ारत
से
कि
आने
वाली
सूरत
तुम
को
क्या
मालूम
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Meem Alif Shaz
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भुलाना
तो
पड़ेगा
ग़म
को
लेकिन
नए
ग़म
को
छुपाना
भी
पड़ेगा
Meem Alif Shaz
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सँभलते
सँभलते
सँभल
ही
न
पाए
जवानी
में
कैसे
क़दम
थे
उठाए
Meem Alif Shaz
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शादमानी,
शादमानी,
शादमानी
उन
के
होटों
की
अदा
भी
क्या
अदा
है
Meem Alif Shaz
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दिया
कैसे
जले
इस
हाल
में
भी
न
रोटी
है,
न
सब्ज़ी
है,
न
अपने
Meem Alif Shaz
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