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Meem Alif Shaz
kholo mat zulfe raushni men aise
kholo mat zulfe raushni men aise | खोलो मत ज़ुल्फ़े रौशनी में ऐसे
- Meem Alif Shaz
खोलो
मत
ज़ुल्फ़े
रौशनी
में
ऐसे
बारिश
होना
जाए
बिना
मौसम
के
- Meem Alif Shaz
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धूप
निकली
है
बारिशों
के
ब'अद
वो
अभी
रो
के
मुस्कुराए
हैं
Anjum Ludhianvi
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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रौशनी
आधी
इधर
आधी
उधर
इक
दिया
रक्खा
है
दीवारों
के
बीच
Obaidullah Aleem
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पहले
ये
काम
बड़े
प्यार
से
माँ
करती
थी
अब
हमें
धूप
जगाती
है
तो
दुख
होता
है
Munawwar Rana
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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यह
जानते
हैं
हम
या
ख़ुदा
जानता
है
बस
कैसे
निकल
के
आए
हैं
उस
तीरगी
से
हम
Amaan Pathan
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मैं
बे-ख़याल
कभी
धूप
में
निकल
आऊँ
तो
कुछ
सहाब
मिरे
साथ
साथ
चलते
हैं
Farhat Abbas Shah
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हम
को
भी
गाँव
की
वो
शाम
बुलाती
है
शाज़
पर
ये
मजबूरियाँ
घर
जाने
नहीं
देती
है
Meem Alif Shaz
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शाम
ढल
गई
है
रोज़ी
अभी
नहीं
आई
रात
में
मिरे
बच्चे
भूख
से
तड़पते
हैं
Meem Alif Shaz
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अब
हमारा
हाल
भी
अच्छा
नहीं
है
सर
झुका
के
चलते
हैं
हम
रात
में
भी
Meem Alif Shaz
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कुछ
मालूम
नहीं
दीवाने
पे
क्या
गुज़री
लाश
बहुत
मोटी
थी
उस
गहरे
पानी
में
Meem Alif Shaz
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सच्चे
रिश्तों
का
उजाला
अब
कहाँ
रोज़
का
मिलना
मिलाना
अब
कहाँ
जब
जवाँ
थे
तोड़ी
थी
दीवार
भी
जिस्म
में
मज़बूत
काँधा
अब
कहाँ
लोग
होते
थे
बचाने
के
लिए
पर
कहीं
ऐसा
किनारा
अब
कहाँ
जो
मोहब्बत
करता
था
ख़त
लिखता
था
इश्क़
लिखने
पढ़ने
वाला
अब
कहाँ
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Meem Alif Shaz
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