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Meem Alif Shaz
ab hamaara haal bhi achha nahin hai
ab hamaara haal bhi achha nahin hai | अब हमारा हाल भी अच्छा नहीं है
- Meem Alif Shaz
अब
हमारा
हाल
भी
अच्छा
नहीं
है
सर
झुका
के
चलते
हैं
हम
रात
में
भी
- Meem Alif Shaz
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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मौत
का
एक
दिन
मुअय्यन
है
नींद
क्यूँँ
रात
भर
नहीं
आती
Mirza Ghalib
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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ठंडी
चाय
की
प्याली
पी
के
रात
की
प्यास
बुझाई
है
Rais Farog
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इक
रात
वो
गया
था
जहाँ
बात
रोक
के
अब
तक
रुका
हुआ
हूँ
वहीं
रात
रोक
के
Farhat Ehsaas
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परेशानी
के
ये
कैसे
सफ़र
में
हूँ
नदी
से
दूर
हूँ
फिर
भी
भँवर
में
हूँ
Meem Alif Shaz
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ख़्वाब
अपना
संभाल
के
रखना
यह
खिलौना
तो
टूट
जाता
है
Meem Alif Shaz
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अपनी
शोहरत
पे
तू
कर
न
इतना
ग़ुरूर
रेत
का
टीला
इक
दम
बिखर
जाता
है
Meem Alif Shaz
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अभी
ख़ामोश
है
ग़ुस्सा
हमारा
अभी
देखा
नहीं
जज़्बा
हमारा
कभी
टूटी
हुई
तलवार
समझो
अभी
आया
नहीं
मौक़ा
हमारा
सिफ़ारिश
चल
रही
है
ज़िन्दगी
से
न
जाने
कब
खुले
रस्ता
हमारा
बुलाने
की
कभी
कोशिश
तो
करते
पिघल
जाता
तभी
शीशा
हमारा
मोहब्बत
से
नहीं
कोई
लड़ाई
मगर
नफ़रत
से
है
झगड़ा
हमारा
नहीं
खाई
कभी
रिश्वत
किसी
की
तभी
तो
रंग
है
फीका
हमारा
उदासी
फेंक
दी
कमरे
से
बाहर
कहीं
हो
जाए
फिर
चर्चा
हमारा
निकलते
जा
रहे
साँसों
के
धागे
बहुत
ही
कम
बचा
जीना
हमारा
मोहब्बत
करना
सीखेंगे
मेरे
शाज़
यहाँ
चलता
नहीं
सिक्का
हमारा
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Meem Alif Shaz
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तेरी
जफ़ा
से
निकले
हैं
मेरे
सारे
ग़म
तेरी
मोहब्बत
भी
कितनी
ज़हरीली
निकली
Meem Alif Shaz
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