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Meem Alif Shaz
faqat jalwon se koi bhi na chahega
faqat jalwon se koi bhi na chahega | फ़क़त जलवों से कोई भी न चाहेगा
- Meem Alif Shaz
फ़क़त
जलवों
से
कोई
भी
न
चाहेगा
ज़रा
सी
सादगी
भी
तो
ज़रूरी
है
- Meem Alif Shaz
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सुबूत
है
ये
मोहब्बत
की
सादा-लौही
का
जब
उस
ने
वा'दा
किया
हम
ने
ए'तिबार
Josh Malihabadi
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कैसे
दिल
का
हाल
सही
हो
सकता
है
जब-तब
यूँँ
तुम
साड़ी
में
दिख
जाओगी
Tanha
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तेरे
होते
हुए
महफ़िल
में
जलाते
हैं
चराग़
लोग
क्या
सादा
हैं
सूरज
को
दिखाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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सादगी
देख
कि
बोसे
की
तमअ
रखता
हूँ
जिन
लबों
से
कि
मुयस्सर
नहीं
दुश्नाम
मुझे
Mushafi Ghulam Hamdani
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न
पूछो
मुझ
सेे
कैसी
लगती
हूँ
मैं
'नीर'
साड़ी
में
किसे
अच्छे
नहीं
लगते
मिरी
जाँ
गाने
नुसरत
के
Neeraj Neer
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तू
भी
सादा
है
कभी
चाल
बदलता
ही
नहीं
हम
भी
सादा
हैं
इसी
चाल
में
आ
जाते
हैं
Afzal Khan
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आपकी
सादा
दिली
ख़ुद
आपकी
तौहीन
है
हुस्न
वालों
को
ज़रा
मग़रूर
होना
चाहिए
Abbas Qamar
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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हुस्न
उनका
सादगी
में
कुछ
अलग
महका
किया
मैंने
धड़कन
से
कहा
धड़को
मगर
आराम
से
Ishq Allahabadi
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मौत
से
भी
यह
मोहब्बत
कम
न
होगी
वो
ख़्यालों
में
रहेगा
फिर
हमारे
Meem Alif Shaz
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मेरा
ग़म
कम
नहीं
होता
साक़ी
बता
अब
तिरे
पानी
में
वो
शिफ़ा
क्यूँ
नहीं
Meem Alif Shaz
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इश्क़
में
कोई
भी
बेकार
नहीं
होता
है
इस
में
लेकिन
कोई
इतवार
नहीं
होता
है
इश्क़
करते
हो
तो
खुल
के
ही
बताओ
उस
को
देखते
रहने
से
इज़हार
नहीं
होता
है
अब
बदलने
लगे
हैं
चीज़ों
के
असली
मानी
यार
होता
है
मगर
यार
नहीं
होता
है
पहले
तो
बैठ
लिया
करते
थे
हम
सब
इक
साथ
अब
मगर
हँसने
को
इतवार
नहीं
होता
है
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Meem Alif Shaz
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तन्हाई
को
देखो
कितनी
गहरी
है
तुम
जब
मुझ
को
छोड़ोगी
तो
डूबोगी
Meem Alif Shaz
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आदमी
मिलता
नहीं
है
आदमी
से
आज
कल
हाल
तो
इक
दूसरे
का
पूछ
लेते
हैं
मगर
Meem Alif Shaz
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