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Meem Alif Shaz
meraa gham kam nahin hota saaqi bataa
meraa gham kam nahin hota saaqi bataa | मेरा ग़म कम नहीं होता साक़ी बता
- Meem Alif Shaz
मेरा
ग़म
कम
नहीं
होता
साक़ी
बता
अब
तिरे
पानी
में
वो
शिफ़ा
क्यूँ
नहीं
- Meem Alif Shaz
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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इस
मरज़
से
कोई
बचा
भी
है
चारा-गर
इश्क़
की
दवा
भी
है
Unknown
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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हाँ
ठीक
है
मैं
अपनी
अना
का
मरीज़
हूँ
आख़िर
मिरे
मिज़ाज
में
क्यूँँ
दख़्ल
दे
कोई
Jaun Elia
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बीमार
को
मरज़
की
दवा
देनी
चाहिए
मैं
पीना
चाहता
हूँ
पिला
देनी
चाहिए
Rahat Indori
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गोया
तुम्हारी
याद
ही
मेरा
इलाज
है
होता
है
पहरों
ज़िक्र
तुम्हारा
तबीब
से
Agha Hashr Kashmiri
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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चारागरी
की
बात
किसी
और
से
करो
अब
हो
गए
हैं
यारो
पुराने
मरीज़
हम
Shuja Khawar
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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हम
जिधर
जाएँ
उधर
ख़तरा
बहुत
है
खौफ़
का
मंज़र
हमें
जीने
न
देगा
Meem Alif Shaz
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ज़माने
को
तमाशा
चाहिए
था
तभी
तो
इतना
खुल
के
रो
पड़े
हम
Meem Alif Shaz
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रहबरों
तुम
से
फ़ायदा
क्या
है
शहरों
में
तुम
ने
भी
किया
क्या
है
तुम
तिजोरी
को
भरते
रहते
हो
पेड़
सूखे
हैं
माजरा
क्या
है
बाप
का
माँ
का
दिल
दुखाया
है
सोचो
जन्नत
का
रास्ता
क्या
है
इश्क़
करते
ही
हक़
जताना
मत
जान
लो
उस
की
भी
रज़ा
क्या
है
ज़ख़्म
देके
चले
गए
तुम
तो
अब
मिरे
ज़ख़्म
की
दवा
क्या
है
मौत
से
ख़ूब
डरते
हो
तो
फिर
उस
से
मिलने
का
रास्ता
क्या
है
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Meem Alif Shaz
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इस
दुनिया
की
बातें
मत
पूछो
तो
बेहतर
होगा
ज़ख़्मो
को
खुलवाती
है
फिर
मिर्च
छिड़क
देती
है
Meem Alif Shaz
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मोहब्बत
में
मोहब्बत
का
ही
वा'दा
होता
है
जानाँ
करो
वा'दा
मोहब्बत
का
करो
दिल
से
मोहब्बत
तुम
Meem Alif Shaz
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