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Meem Alif Shaz
ishq men koi bhi bekar nahin hota hai
ishq men koi bhi bekar nahin hota hai | इश्क़ में कोई भी बेकार नहीं होता है
- Meem Alif Shaz
इश्क़
में
कोई
भी
बेकार
नहीं
होता
है
इस
में
लेकिन
कोई
इतवार
नहीं
होता
है
इश्क़
करते
हो
तो
खुल
के
ही
बताओ
उस
को
देखते
रहने
से
इज़हार
नहीं
होता
है
अब
बदलने
लगे
हैं
चीज़ों
के
असली
मानी
यार
होता
है
मगर
यार
नहीं
होता
है
पहले
तो
बैठ
लिया
करते
थे
हम
सब
इक
साथ
अब
मगर
हँसने
को
इतवार
नहीं
होता
है
- Meem Alif Shaz
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इज़हार-ए-इश्क़
उस
से
न
करना
था
'शेफ़्ता'
ये
क्या
किया
कि
दोस्त
को
दुश्मन
बना
दिया
Mustafa Khan Shefta
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दिल
से
निकलेगी
न
मर
कर
भी
वतन
की
उल्फ़त
मेरी
मिट्टी
से
भी
ख़ुशबू-ए-वफ़ा
आएगी
Lal Chand Falak
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कुछ
न
मैं
समझा
जुनून
ओ
इश्क़
में
देर
नासेह
मुझ
को
समझाता
रहा
Meer Taqi Meer
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रास्ता
जब
इश्क़
का
मौजूद
है
फिर
किसी
की
क्यूँँ
इबादत
कीजिए?
ख़ुद-कुशी
करना
बहुत
आसान
है
कुछ
बड़ा
करने
की
हिम्मत
कीजिए
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Bhaskar Shukla
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हाए
रे
मजबूरियाँ,
महरूमियाँ,
नाकामियाँ
इश्क़
आख़िर
इश्क़
है,
तुम
क्या
करो,
हम
क्या
करें
Jigar Moradabadi
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हर
लड़के
में
एक
ख़राबी
होती
है
उसको
अपना
इश्क़
इबादत
लगता
है
Saurabh Sharma 'sadaf'
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तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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सोचा
समझा
इश्क़
नहीं
करते
हैं
हम
नादानों
से
नादानी
हो
जाती
है
Upendra Bajpai
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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मैं
तो
तुम
को
भूल
चुका
हूँ
जाने
कब
का
महबूबा
अपना
चेहरा
याद
दिला
के
मुझ
को
हैरत
में
डालो
Meem Alif Shaz
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खुलता
नहीं
है
रस्ता
मेरा
कैसे
होगा
गुज़ारा
मेरा
अपने
दर
से
न
लौटा
मुझ
को
तू
है
तो
है
सहारा
मेरा
उस
क़े
ख़त
को
जलाऊँ
कैसे
उस
में
दिल
तो
जलेगा
मेरा
मेरे
मुख़ालिफ़
क्या
कर
लेंगे
बूढ़ा
नहीं
है
जज़्बा
मेरा
घर
के
अंदर
ग़ुर्बत
देखो
चादर
का
है
साया
मेरा
मेरी
फ़कीरी
पे
हँसना
मत
सोने
का
है
काँसा
मेरा
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Meem Alif Shaz
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आदमी
ही
तो
हूँ
मैं
जैसा
भी
हूँ
कोई
अच्छा
भी
है
मेरे
अंदर
Meem Alif Shaz
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ज़िन्दगी
तुझ
को
न
जी
पाए
हम
वक़्त
ने
दर्द
दिया
जब
इतना
Meem Alif Shaz
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ज़लज़ला
शायद
नहीं
आया
उधर
जो
कभी
मग़रूर
थे
मग़रूर
हैं
Meem Alif Shaz
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