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Meem Alif Shaz
achchhe logon ki koi bhi qeemat nahin
achchhe logon ki koi bhi qeemat nahin | अच्छे लोगों की कोई भी क़ीमत नहीं
- Meem Alif Shaz
अच्छे
लोगों
की
कोई
भी
क़ीमत
नहीं
अब
किसी
को
भी
सच
की
ज़रूरत
नहीं
दावा
तो
है
मोहब्बत
का
लेकिन
उन्हें
हाल
तक
पूछने
की
भी
फ़ुर्सत
नहीं
अपने
घर
छोड़
के
चल
दिए
हैं
वहाँ
शुक्र
है
शहर
में
ऐसी
दहशत
नहीं
जो
नमाज़ें
अदा
कर
रहे
हैं
बहुत
झूठ
से
उनको
भी
कोई
नफ़रत
नहीं
अपनी
मर्ज़ी
से
वो
जान
लेते
हैं
शाज़
शहर
में
अब
किसी
की
हिफ़ाज़त
नहीं
- Meem Alif Shaz
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शग़्ल
था
दश्त-नवर्दी
का
कभी
ऐ
'ताबाँ'
अब
गुलिस्ताँ
में
भी
जाते
हुए
डर
लगता
है
Anwar Taban
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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अस्ल
में
पाया
ही
'दानिश'
तब
उसे
जब
उसे
खोने
का
डर
जाता
रहा
Madan Mohan Danish
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मुझे
अब
तुम
से
डर
लगने
लगा
है
तुम्हें
मुझ
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
Jaun Elia
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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मेरे
जिस्म
से
भी
रूह
को
हटा
दिया
गया
ख़ाक
में
मुझे
भी
एक
दिन
मिला
दिया
गया
लोगों
के
हसद
की
आग
से
हुआ
ये
हादसा
मेरे
ख़्वाब
को
बुरी
तरह
जला
दिया
गया
में
चला
था
ख़ुद
अँधेरों
को
मिटाने
इसलिए
मेरे
हौसले
के
दीप
को
बुझा
दिया
गया
हम
किसे
बताते
सरहदों
पे
जश्न
क्यूँ
हुआ
मेरे
सामने
मकान
को
जला
दिया
गया
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Meem Alif Shaz
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हम
तेरी
इस
फ़ितरत
से
आजिज़
आ
गए
हैं
तू
सिगरेट
का
भी
करता
है
एक
तमाशा
Meem Alif Shaz
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मुझे
तुम
भी
मोहब्बत
से
बुलाओ
तो
अना
का
यह
जो
पत्थर
है
हटाओ
तो
तुम्हारी
अहलिया
मैं
भी
हो
सकती
हूँ
मिरा
दिल
तुम
नज़ाकत
से
चुराओ
तो
सितारों
की
तरह
जब
जगमगाना
है
चराग़ों
की
तरह
ख़ुद
को
जलाओ
तो
ज़माना
पूछता
है
झूठ
वालों
को
ज़माने
को
ज़रा
सच
भी
सिखाओ
तो
हमेशा
ख़ूब
खाते
हो
अकेले
ही
गरीबों
को
भी
कुछ
दिल
से
खिलाओ
तो
ख़बर
जो
भी
छपेगी
झूठ
ही
होगी
हक़ीक़त
के
लिए
ख़ुद
को
चलाओ
तो
अँधेरा
भी
हमेशा
हार
जाएगा
कभी
दिल
का
दिया
तुम
भी
जलाओ
तो
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Meem Alif Shaz
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पैसे
वाले
भी
तो
बेज़ार
नज़र
आते
हैं
अब
तो
चेहरों
से
भी
बीमार
नज़र
आते
हैं
दुश्मनों
ने
मुझे
दावत
पे
बुलाया
है
आज
वो
भी
अब
मेरे
ख़रीदार
नज़र
आते
हैं
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Meem Alif Shaz
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अब
के
फूल
गिरेंगे
उस
की
ज़ुबाँ
से
हम
ने
ऐसा
सोचा
है
जो
हम
ने
सोचा
है
उस
ने
भी
सोचा
होगा
तो
क्या
होगा
Meem Alif Shaz
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