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Meem Alif Shaz
ham teri is fitrat se aziz aa ga.e hain
ham teri is fitrat se aziz aa ga.e hain | हम तेरी इस फ़ितरत से आजिज़ आ गए हैं
- Meem Alif Shaz
हम
तेरी
इस
फ़ितरत
से
आजिज़
आ
गए
हैं
तू
सिगरेट
का
भी
करता
है
एक
तमाशा
- Meem Alif Shaz
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मेरे
होंटों
पे
किसी
लम्स
की
ख़्वाहिश
है
शदीद
ऐसा
कुछ
कर
मुझे
सिगरेट
को
जलाना
न
पड़े
Umair Najmi
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बला
की
ख़ूब-सूरत
वो
उसे
ही
देख
जीता
हूँ
मुझे
उसकी
ज़रूरत
है,
न
मैं
उसका
चहीता
हूँ
कभी
उसको
परेशानी
मिरे
सिगरेट
से
होती
थी
उसे
बोलो
अभी
कोई
कि
मैं
दारू
भी
पीता
हूँ
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Deepankar
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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बुरा
मनाया
था
हर
आहट
हर
सरगोशी
का
सोचो
कितना
ध्यान
रखा
उसने
ख़ामोशी
का
तुम
इसका
नुक़सान
बताती
अच्छी
लगती
हो
वरना
हम
को
शौक़
नहीं
है
सिगरेट-नोशी
का
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Khurram Afaq
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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छत
पे
सिगरेट
ले
के
बैठा
है
चाँद
भी
बेक़रार
है
शायद
Satya Prakash Soni
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हमारे
साँस
भी
ले
कर
न
बच
सके
अफ़ज़ल
ये
ख़ाक-दान
में
दम
तोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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नहीं
था
ध्यान
कोई
तोड़ते
हुए
सिगरेट
मैं
तुझ
को
भूल
गया
छोड़ते
हुए
सिगरेट
Afzal Khan
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सिगरेट
जिसे
सुलगता
हुआ
कोई
छोड़
दे
उस
का
धुआँ
हूँ
और
परेशाँ
धुआँ
हूँ
मैं
Ameeq Hanafi
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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हम
ख़ुद
लेने
आ
जाते
कहते
तो
यह
क्या
है!
नाराज़
हुए
बैठे
हो
Meem Alif Shaz
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हम
को
मोहब्बत
ने
कहाँ
जीने
दिया
दिन
रात
उस
को
सोचा
जिसने
की
जफ़ा
Meem Alif Shaz
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ज़माना
तो
बदल
जाए
अगर
तुम
बदलने
की
क़सम
खाओ
ख़ुशी
से
Meem Alif Shaz
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अभी
ख़ामोश
है
ग़ुस्सा
हमारा
अभी
देखा
नहीं
जज़्बा
हमारा
कभी
टूटी
हुई
तलवार
समझो
अभी
आया
नहीं
मौक़ा
हमारा
सिफ़ारिश
चल
रही
है
ज़िन्दगी
से
न
जाने
कब
खुले
रस्ता
हमारा
बुलाने
की
कभी
कोशिश
तो
करते
पिघल
जाता
तभी
शीशा
हमारा
मोहब्बत
से
नहीं
कोई
लड़ाई
मगर
नफ़रत
से
है
झगड़ा
हमारा
नहीं
खाई
कभी
रिश्वत
किसी
की
तभी
तो
रंग
है
फीका
हमारा
उदासी
फेंक
दी
कमरे
से
बाहर
कहीं
हो
जाए
फिर
चर्चा
हमारा
निकलते
जा
रहे
साँसों
के
धागे
बहुत
ही
कम
बचा
जीना
हमारा
मोहब्बत
करना
सीखेंगे
मेरे
शाज़
यहाँ
चलता
नहीं
सिक्का
हमारा
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Meem Alif Shaz
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अब
वो
छत
पर
मुझे
ऐसे
बुलाती
है
जैसे
वो
धूप
जाड़े
में
दिसंबर
की
Meem Alif Shaz
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