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Jatin shukla
paanv ka panghaton ke milan maatra se
paanv ka panghaton ke milan maatra se | पाँव का पनघटों के मिलन मात्र से
- Jatin shukla
पाँव
का
पनघटों
के
मिलन
मात्र
से
जल
ठहर
जाएगा
बस
छुवन
मात्र
से
मात
खा
कर
नदी
भी
सिमट
जाएगी
आप
के
झील
जैसे
नयन
मात्र
से
- Jatin shukla
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हज़ार
बर्क़
गिरे
लाख
आँधियाँ
उट्ठें
वो
फूल
खिल
के
रहेंगे
जो
खिलने
वाले
हैं
Sahir Ludhianvi
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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मैं
जिसे
ओढ़ता
बिछाता
हूँ
वो
ग़ज़ल
आप
को
सुनाता
हूँ
एक
जंगल
है
तेरी
आँखों
में
मैं
जहाँ
राह
भूल
जाता
हूँ
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Dushyant Kumar
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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हम
इक
ही
लौ
में
जलाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
नई
हवा
से
बचाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
दरअस्ल
उसको
फ़क़त
चाय
ख़त्म
करनी
थी
हम
उसके
कप
को
सुनाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
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Zubair Ali Tabish
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तुम
न
टूटो
कभी
भी
इसलिए
पत्थर
है
कहा
मैं
तुम्हें
फूल
जो
कहता
तो
बिखर
जाती
तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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और
किसी
का
क़ब्ज़ा
होना
लाज़िम
है
इस
बंजर
का
सहरा
होना
लाज़िम
है
इनसे
पहले
वाले
साहब
गूँगे
थे
सो
इनका
भी
बहरा
होना
लाज़िम
है
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Jatin shukla
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तुम्हारा
इश्क़
साहब
काग़ज़ी
है
तभी
हर
बात
पे
नाराज़गी
है
भला
मेहबूब
किसका
रूठता
है
अगर
रूठा
तो
समझो
दिल-लगी
है
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Jatin shukla
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मोहब्बत
मत
करो
इतनी
मुझे
तुम
यही
कह,
फ़ोन
पर
रोती
रही
वो
Jatin shukla
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वर्ना
तोहफ़े
दिल्ली
भेजे
जाते
पर
चूड़ी
का
अपमान
नहीं
कर
सकता
मैं
Jatin shukla
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मटकती
चाल
मतवाली
हमारी
जान
ले
लेगी
छनकती
कान
की
बाली
हमारी
जान
ले
लेगी
छुपा
कर
चाँद
सा
मुखड़ा
करो
तुम
हुस्न
पर्दे
में
नहीं
तो
होंठ
की
लाली
हमारी
जान
ले
लेगी
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Jatin shukla
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