ghar jale bastii jale kuchh mat kaho bas chup raho | घर जले बस्ती जले कुछ मत कहो बस चुप रहो

  - Janib Vishal
घरजलेबस्तीजलेकुछमतकहोबसचुपरहो
बातजोभीहोभलेकुछमतकहोबसचुपरहो
सुब्हआएयाचलीजाएजहाँमेंयाकिफिर
शामढलतीहैढलेकुछमतकहोबसचुपरहो
कानदोनोंबंदकरलोयाजगहहीछोड़दो
कोईजबअपनीदलेकुछमतकहोबसचुपरहो
येदिएकामसअलाहैसोदियाजानेइसे
तीरगीक्यूँँहैतलेकुछमतकहोबसचुपरहो
जीतहोगीहारहोगीजोभीहोगाठीकहै
चालजबअपनाचलेकुछमतकहोबसचुपरहो
येज़मानातोसमझनेसेरहाजानिबकिफिर
दर्दजबसीनाछलेकुछमतकहोबसचुपरहो
  - Janib Vishal
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