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Ajay Kumar
haath hai to salaath hoti hai
haath hai to salaath hoti hai | हाथ है तो सलात होती है
- Ajay Kumar
हाथ
है
तो
सलात
होती
है
बात
करने
से
बात
होती
है
आदमी
की
ही
ज़ात
हो
ना
तुम
जो
बड़ी
वाहियात
होती
है
- Ajay Kumar
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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अपनी
हस्ती
का
भी
इंसान
को
इरफ़ांन
हुआ
ख़ाक
फिर
ख़ाक
थी
औक़ात
से
आगे
न
बढ़ी
Shakeel Badayuni
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किसी
भी
बात
का
शिकवा
नहीं
है
हमारे
बीच
क्या
झगड़ा
नहीं
है
हमें
इक
चेहरे
की
आदत
हो
जाए
किसी
को
इतना
भी
चाहा
नहीं
है
उदासी
के
सबब
वादे
रहे
हैं
उदासी
का
सबब
धोखा
नहीं
है
हमारी
ज़ात
का
ही
मसअला
है
हमारा
मसअला
झगड़ा
नहीं
है
किसी
ने
जितनी
उम्मीदें
रखी
हैं
हमारे
पास
तो
उतना
नहीं
है
चलो
फिर
से
अकेले
ही
चलेंगे
किसी
ने
साथ
तो
आना
नहीं
है
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Ajay Kumar
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आदमी
उम्र
को
घटाता
है
चेहरा
है
सिलवटें
दिखाता
है
मुझको
मेरे
ख़राब
होने
का
बेसबब
ही
ख़याल
आता
है
कोई
रिश्ता
हो
तो
निभाऊँ
मैं
कौन
ही
हादसा
निभाता
है
ख़ुद-कुशी
ने
किवाड़
खोले
हैं
और
वो
रस्सियाँ
बनाता
है
एक
ही
रंग
पे
निगाहें
हैं
एक
ही
रंग
मुझको
भाता
है
आपको
देखना
मुनासिब
है
आपका
मुझ
सेे
एक
नाता
है
अच्छे
लोगों
से
बात
होती
थी
अब
मुझे
कौन
ही
बुलाता
है
मैं
मुकम्मल
उदास
रहता
हूँ
एक
दुख
ऐसे
मुझको
खाता
है
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Ajay Kumar
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अब
मेरी
ख़ातिर
यूँँ
हँसता
कौन
है
अब
हूँ
समझा
मैं
कि
खोया
कौन
है
तुम
हमें
बिगड़ा
बताते
हो
मगर
आजकल
वैसे
भी
सीधा
कौन
है
जो
तू
ने
मैसेज
कर
कर
के
कही
वो
तिरी
हर
बात
भूला
कौन
है
वो
मनाने
से
नहीं
हैं
मानते
ए
ख़ुदा
इतना
भी
रुसवा
कौन
है
ख़ूब-सूरत
लोग
होंगे
और
भी
इस
जहाँ
में
तेरे
जैसा
कौन
है
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Ajay Kumar
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उनके
चेहरे
पर
सितारे
बैठे
हैं
फूल
पर
सारे
के
सारे
बैठे
हैं
एक
उसका
दुख
गले
लग
बैठा
है
और
बाक़ी
दुख
किनारे
बैठे
हैं
धूप
भी
क़दमों
तले
पामाल
है
फूल
फिर
किसके
सहारे
बैठे
हैं
एक
डायन
सारी
रौनक़
खा
गई
बे-कसी
दिल
में
उतारे
बैठे
हैं
हमको
मौसम
आज़माने
आए
हैं
हम
तो
पैरों
को
पसारे
बैठे
है
कौन
जाने
चाहने
वालों
का
दुख
चाहने
वाले
कँवारे
बैठे
हैं
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Ajay Kumar
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कौन
ही
सुने
ऐसे
दरकिनार
लोगों
को
सच
ख़राब
लगता
हैं
होशियार
लोगों
को
जो
गुनाह
करके
ही
कामयाब
होते
हैं
बे-शुमार
लानत
उन
माल-दार
लोगों
को
क्या
रखा
है
ऐसा
भी
ला-जवाब
जो
तुझ
में
तेरी
दीद
ही
कर
दे
बे-क़रार
लोगों
को
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Ajay Kumar
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