kisi maik ka man khul gaya hai | किसी शर्मीले का मन खुल गया है

  - Harshad B tiwari
किसीशर्मीलेकामनखुलगयाहै
किइकबोतलकाढक्कनखुलगयाहै
इधरमैंनेघड़ीबाँधीनहींआज
उधरउसकाभीकंगनखुलगयाहै
हुईहैमेरेदरवाज़ेपेदस्तक
परउसकेघरकाचिलमनखुलगयाहै
सुख़नपैवस्तथामुझ
मेंकहींपे
तेरेआनेसेयेफ़नखुलगयाहै
मेरेदामनमेंकुछग़ज़लेथींऔर'अब
अचानकसेयेदामनखुलगयाहै
तुम्हीकहतीथींनाजन्मोंकाबंधन
तोक्यासमझूंकिबंधनखुलगयाहै
  - Harshad B tiwari
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