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Rohit Gustakh
jabse bola usne haay muhabbat se
jabse bola usne haay muhabbat se | जबसे बोला उसने हाए मुहब्बत से
- Rohit Gustakh
जबसे
बोला
उसने
हाए
मुहब्बत
से
ली
फिर
दीवानों
की
राय
मुहब्बत
से
आते
देख
छुपा
करती
थी
जो
लड़की
उसने
आज
पिलाई
चाय
मुहब्बत
से
- Rohit Gustakh
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चाँद
भी
जिस
के
आगे
फीका
है
सिर्फ़
औरत
ही
वो
सितारा
है
Intzar Akhtar
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तितली
वो
ही
फूल
चुनेगी
जिस
पर
उसका
दिल
आए
इक
लड़की
के
पीछे
इतनी
मारामारी
ठीक
नहीं
Shubham Seth
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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सामने
वो
यूँँ
मिरे
डब्बा
टिफ़िन
का
रखती
थी
जैसे
थाली
खाने
की
बीवी
लगाकर
देती
है
Aarush Sarkaar
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ऐसे
तेवर
दुश्मन
ही
के
होते
हैं
पता
करो
ये
लड़की
किस
की
बेटी
है
Zia Mazkoor
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किताब
फ़िल्म
सफ़र
इश्क़
शा'इरी
औरत
कहाँ
कहाँ
न
गया
ख़ुद
को
ढूँढता
हुआ
मैं
Jawwad Sheikh
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आँखें
देखूँ
तो
नज़र
चेहरे
से
हट
जाती
है
ऐसी
औरत
है
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Fareh Shujeeh
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मौत
आए
तो
कुछ
पल
पहले
पता
चले
फ़ोन
लगाना
है
मुझको
इक
लड़की
को
Tanoj Dadhich
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ख़ुश्बू
की
बरसात
नहीं
कर
पाते
हैं
हम
ख़ुद
ही
शुरुआत
नहीं
कर
पाते
हैं
जिस
लड़की
की
बातें
करते
हैं
सब
सेे
उस
लड़की
से
बात
नहीं
कर
पाते
हैं
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Gyan Prakash Akul
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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मोहब्बत
को
पराई
कर
रही
हो
सुना
है
तुम
सगाई
कर
रही
हो
यहाँ
बस
ज़िंदगी
इक
तीरगी
है
वहाँ
तुम
मुँह-दिखाई
कर
रही
हो
क़फ़स
मायूस
हो
कर
रो
रहा
है
परिंदे
की
रिहाई
कर
रही
हो
ग़म-ए-दुनिया
से
आगे
कुछ
नहीं
है
जहाँ
तुम
आशनाई
कर
रही
हो
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Rohit Gustakh
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मौत
को
चूमकर
लौट
आए
हैं
हम
आप
उलझे
रहे
ज़िंदगी
में
यहीं
Rohit Gustakh
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कहीं
ये
सब्र
खा
जाए
न
हमको
किसी
के
दुख
समेटे
फिर
रहे
हैं
Rohit Gustakh
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वक़्त
की
थी
कमी
गर्दिशों
के
थे
दिन
वक़्त
देना
पड़ा
हर
किसी
के
लिए
Rohit Gustakh
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हमारे
बा'द
चर्चा
कर
रहे
हैं
तिरी
यादों
को
रुस्वा
कर
रहे
हैं
ग़ज़ल
की
नाव
में
बैठे
हुए
हम
तिरे
ग़म
से
किनारा
कर
रहे
हैं
तबस्सुम
था
कभी
गहना
हमारा
उदासी
से
गुज़ारा
कर
रहे
हैं
तिरी
ये
बे-हयाई
और
तग़ाफ़ुल
रक़ीबों
को
इशारा
कर
रहे
हैं
बुरा
है
वक़्त
सो
हम
ज़िंदगी
में
किसी
पर
भी
भरोसा
कर
रहे
हैं
शिकायत
क्या
करें
हम
दुश्मनों
से
हबीबों
से
किनारा
कर
रहे
हैं
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Rohit Gustakh
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