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Rohit Gustakh
vaqt ki thii kamii gardishon ke the din
vaqt ki thii kamii gardishon ke the din | वक़्त की थी कमी गर्दिशों के थे दिन
- Rohit Gustakh
वक़्त
की
थी
कमी
गर्दिशों
के
थे
दिन
वक़्त
देना
पड़ा
हर
किसी
के
लिए
- Rohit Gustakh
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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वक़्त
हर
ज़ख़्म
का
मरहम
तो
नहीं
बन
सकता
दर्द
कुछ
होते
हैं
ता-उम्र
रुलाने
वाले
Sada Ambalvi
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तब
हम
दोनों
वक़्त
चुरा
कर
लाते
थे
अब
मिलते
हैं
जब
भी
फ़ुर्सत
होती
है
Javed Akhtar
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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जनम
दिन
पर
घड़ी
दी
थी
उन्होंने
हमें
उम्मीद
थी
वो
वक़्त
देंगे
Harsh saxena
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वक़्त
देता
था
वो
मिलने
का
तभी
रक्खी
थी
दोस्त
इक
दौर
था
मैंने
भी
घड़ी
रक्खी
थी
Nadir Ariz
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सदा
ऐश
दौराँ
दिखाता
नहीं
गया
वक़्त
फिर
हाथ
आता
नहीं
Meer Hasan
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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हो
गया
सामना
आज
फिर
मौत
से
जेब
में
थीं
दुआएँ
बचा
ले
गईं
Rohit Gustakh
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मुहब्बत
में
समझदारी
से
अक्सर
काम
लेते
हैं
कहीं
महबूब
वो
कहते
कहीं
वो
नाम
लेते
हैं
मचलता
है
कभी
जो
दिल
करें
बातें
निगाहों
से
इज़ाज़त
धड़कने
देतीं
वो
दिल
को
थाम
लेते
हैं
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Rohit Gustakh
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दिल
के
घाव
कभी
तो
भर
जाएँगे
पर
नज़रों
से
लोग
उतर
जाएँगे
हम
सच
की
कुटिया
के
बाशिंदे
हैं
झूठ
अगर
बोले
तो
मर
जाएँगे
राजा
दशरथ
को
ये
इल्म
कहाँ
था
ख़ुद
के
वरदानों
से
मर
जाएँगे
कौन
डुबाएगा
दरिया
में
हमको
ख़ुद
पर
राम
लिखेंगे
तर
जाएँगे
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Rohit Gustakh
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ग़म-ए-दुनिया
से
आगे
कुछ
नहीं
है
जहाँ
तुम
आशनाई
कर
रही
हो
Rohit Gustakh
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तुमको
क्या
बस
पानी
देना
है
गमलों
में
तितली
से
पूछो
काँटा
कैसा
होता
है
Rohit Gustakh
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