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Rohit Gustakh
dil ke ghaav kabhi to bhar jaayenge
dil ke ghaav kabhi to bhar jaayenge | दिल के घाव कभी तो भर जाएँगे
- Rohit Gustakh
दिल
के
घाव
कभी
तो
भर
जाएँगे
पर
नज़रों
से
लोग
उतर
जाएँगे
हम
सच
की
कुटिया
के
बाशिंदे
हैं
झूठ
अगर
बोले
तो
मर
जाएँगे
राजा
दशरथ
को
ये
इल्म
कहाँ
था
ख़ुद
के
वरदानों
से
मर
जाएँगे
कौन
डुबाएगा
दरिया
में
हमको
ख़ुद
पर
राम
लिखेंगे
तर
जाएँगे
- Rohit Gustakh
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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जब
उनको
बाहें
फैलाए
देखा
तो
याद
हमें
आई
सावन
के
झूलों
की
Rohit Gustakh
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मौत
को
चूमकर
लौट
आए
हैं
हम
आप
उलझे
रहे
ज़िंदगी
में
यहीं
Rohit Gustakh
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क़िस्मत
में
लिक्खा
था
सो
बनवास
मिला
हमको
वर्ना
जन्में
तो
हम
भी
थे
राजघराने
में
Rohit Gustakh
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हमारे
बा'द
चर्चा
कर
रहे
हैं
तिरी
यादों
को
रुस्वा
कर
रहे
हैं
ग़ज़ल
की
नाव
में
बैठे
हुए
हम
तिरे
ग़म
से
किनारा
कर
रहे
हैं
तबस्सुम
था
कभी
गहना
हमारा
उदासी
से
गुज़ारा
कर
रहे
हैं
तिरी
ये
बे-हयाई
और
तग़ाफ़ुल
रक़ीबों
को
इशारा
कर
रहे
हैं
बुरा
है
वक़्त
सो
हम
ज़िंदगी
में
किसी
पर
भी
भरोसा
कर
रहे
हैं
शिकायत
क्या
करें
हम
दुश्मनों
से
हबीबों
से
किनारा
कर
रहे
हैं
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Rohit Gustakh
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