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Subrat Tripathi
likhenge geet ek 'aashiq sabhi jo gungunaayege
likhenge geet ek 'aashiq sabhi jo gungunaayege | लिखेंगे गीत एक 'आशिक़ सभी जो गुनगुनाएँगे
- Subrat Tripathi
लिखेंगे
गीत
एक
'आशिक़
सभी
जो
गुनगुनाएँगे
उसे
सुनकर
तुम्हें
फिर
और
फिर
हम
और
चाहेंगे
- Subrat Tripathi
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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चुरायगा
उसी
से
आँख
क़ातिल
ज़रा
सी
जान
जिस
बिस्मिल
में
होगी
Dagh Dehlvi
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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वरना
तो
बेवफ़ाई
किसे
कब
मुआ'फ़
है
तू
मेरी
जान
है
सो
तुझे
सब
मुआ'फ़
है
क्यूँ
पूछती
हो
मैंने
तुम्हें
माफ़
कर
दिया
ख़ामोश
हो
गया
हूँ
मैं
मतलब
मुआ'फ़
है
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Vikram Gaur Vairagi
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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एक
हमीं
तेरे
अपने
हैं,
बाकी
सब
बेगाने
है
एक
हमीं
में
पागलपन
है,
बाकी
सब
दीवाने
है
Subrat Tripathi
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तेरे
शहर
में
एक
मकाँ
ऐसा
भी
बसता
है
जिसके
हर
ज़र्रे
में
तेरी
यादें
पसरी
हैं
Subrat Tripathi
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और
क्या
ही
था
हमारे
पास
देने
को
तुम्हें
ख़्वाब
मेरे
आँख
के
तुमको
मुबारक
हो
सनम
Subrat Tripathi
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पहले
तेरे
नाम
से
राह
निकलते
थे
अब
तो
तेरे
नाम
से
राह
बदलते
हैं
Subrat Tripathi
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पहली
दफ़ा
जब
तुमने
हमको
चूमा
था
पहली
दफ़ा
तब
मैं
दिल
भर
कर
रोया
था
Subrat Tripathi
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