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Subrat Tripathi
pahle tere naam se raah nikalte the
pahle tere naam se raah nikalte the | पहले तेरे नाम से राह निकलते थे
- Subrat Tripathi
पहले
तेरे
नाम
से
राह
निकलते
थे
अब
तो
तेरे
नाम
से
राह
बदलते
हैं
- Subrat Tripathi
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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बाद
तेरे
नहीं
कोई
हमें
मंज़िल
की
तलब
हमने
सोचा
है
कि
हम
राह
भटक
जाएँगे
Prince
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हारी
शक्ल
किसी
शक्ल
से
मिलाते
हुए
मैं
खो
गया
हूँ
नया
रास्ता
बनाते
हुए
Ashu Mishra
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हम
जान
से
जाएँगे
तभी
बात
बनेगी
तुम
से
तो
कोई
राह
निकाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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रास्ता
सोचते
रहने
से
किधर
बनता
है
सर
में
सौदा
हो
तो
दीवार
में
दर
बनता
है
Jaleel 'Aali'
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हर
तरफ़
उग
आए
हैं
जंगल
हमारी
हार
के
जीत
का
कोई
भी
रस्ता
अब
नहीं
दिखता
हमें
Siddharth Saaz
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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और
बचा
ही
क्या
पढ़ने
को
उसकी
ऑंखें
पढ़
आया
हूँ
Subrat Tripathi
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नज़र
से
दूर
होते
जा
रहे
हो
बहुत
मशहूर
होते
जा
रहे
हो
फ़क़त
दिन
चार
की
है
ज़िन्दगी
ये
मगर
रंजूर
रहते
जा
रहे
हो
बिछड़
के
शा'इरी
हो
लिख
रहे
तुम
मिरा
मज़कूर
होते
जा
रहे
हो
तुझे
ही
याद
करता
हूँ
सदा
मैं
मिरा
सिंदूर
होते
जा
रहे
हो
नज़र
आते
नहीं
दुनिया
जहाँ
में
फ़लक
का
हूर
होते
जा
रहे
हो
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Subrat Tripathi
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कोई
हमको
क्यूँँ
देखेगा
अपनों
में
कोई
हमको
क्यूँँ
सोचेगा
सपनों
में
Subrat Tripathi
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क्या
पता
कब
प्रेम
से
मन
ऊब
जाएँ
क्या
पता
कब
पंखे
से
हम
झूल
जाएँ
Subrat Tripathi
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तेरे
शहर
में
एक
मकाँ
ऐसा
भी
बसता
है
जिसके
हर
ज़र्रे
में
तेरी
यादें
पसरी
हैं
Subrat Tripathi
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