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Subrat Tripathi
nazar se door hote ja rahe ho
nazar se door hote ja rahe ho | नज़र से दूर होते जा रहे हो
- Subrat Tripathi
नज़र
से
दूर
होते
जा
रहे
हो
बहुत
मशहूर
होते
जा
रहे
हो
फ़क़त
दिन
चार
की
है
ज़िन्दगी
ये
मगर
रंजूर
रहते
जा
रहे
हो
बिछड़
के
शा'इरी
हो
लिख
रहे
तुम
मिरा
मज़कूर
होते
जा
रहे
हो
तुझे
ही
याद
करता
हूँ
सदा
मैं
मिरा
सिंदूर
होते
जा
रहे
हो
नज़र
आते
नहीं
दुनिया
जहाँ
में
फ़लक
का
हूर
होते
जा
रहे
हो
- Subrat Tripathi
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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मेरी
शोहरत
के
तक़ाज़े
ही
अलग
थे
ताबिश
गुमशुदा
रहते
हुए
नाम
कमाना
था
मुझे
Tousief Tabish
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ज़माने
से
मिली
शोहरत
ज़माने
तक
ही
सीमित
है
हम
अपना
कद
हमारे
दोस्त
से
ऊँचा
नहीं
रखते
Asad Akbarabadi
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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अब
न
मैं
वो
हूँ
न
बाकी
हैं
ज़माने
मेरे
फिर
भी
मशहूर
हैं
शहरों
में
फ़साने
मेरे
Rahat Indori
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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क्या
पूछते
हो
कौन
है
ये
किस
की
है
शोहरत
क्या
तुम
ने
कभी
'दाग़'
का
दीवां
नहीं
देखा
Dagh Dehlvi
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मोहब्बत
को
छुपाए
लाख
कोई
छुप
नहीं
सकती
ये
वो
अफ़्साना
है
जो
बे-कहे
मशहूर
होता
है
Lala Madhav Ram Jauhar
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शोहरत
की
बुलंदी
भी
पल
भर
का
तमाशा
है
जिस
डाल
पे
बैठे
हो
वो
टूट
भी
सकती
है
Bashir Badr
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पहुँचते
ही
नहीं
हैं
शे'र
उन
तक
हमें
मशहूर
होना
पड़
रहा
है
Tanoj Dadhich
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एक
हमीं
तेरे
अपने
हैं,
बाकी
सब
बेगाने
है
एक
हमीं
में
पागलपन
है,
बाकी
सब
दीवाने
है
Subrat Tripathi
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चाँद
को
अपने
पकड़
में
कर
चुकी
है
चाँद
की
रौनक
जकड़
के
मर
चुकी
है
याद
रहते
थे
जिसे
तुम
मुँह
ज़बानी
याद
वो
तुम
सेे
बिछड़
के
मर
चुकी
है
तोड़
देता
है
नई
कलियाँ
मसलकर
यार
तेरी
रूह
सड़
के
मर
चुकी
है
रात
जब
चुभने
लगे
तो
ये
समझ
लो
आशिक़ी
तुमको
पकड़
में
कर
चुकी
है
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Subrat Tripathi
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लिखेंगे
गीत
एक
'आशिक़
सभी
जो
गुनगुनाएँगे
उसे
सुनकर
तुम्हें
फिर
और
फिर
हम
और
चाहेंगे
Subrat Tripathi
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आँखें
जब
बूढ़ी
होती
है
ठेस
अंगूठा
सह
लेता
है
Subrat Tripathi
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हिज्र
से
तंग
आके
मैंने
तस्वीर
उसकी
तोड़
दी
छिपकली
भी
देख
कर
ये
दर्द
मेरा
रो
पड़ी
Subrat Tripathi
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