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Subrat Tripathi
chaand ko apne pakad men kar chuki hai
chaand ko apne pakad men kar chuki hai | चाँद को अपने पकड़ में कर चुकी है
- Subrat Tripathi
चाँद
को
अपने
पकड़
में
कर
चुकी
है
चाँद
की
रौनक
जकड़
के
मर
चुकी
है
याद
रहते
थे
जिसे
तुम
मुँह
ज़बानी
याद
वो
तुम
सेे
बिछड़
के
मर
चुकी
है
तोड़
देता
है
नई
कलियाँ
मसलकर
यार
तेरी
रूह
सड़
के
मर
चुकी
है
रात
जब
चुभने
लगे
तो
ये
समझ
लो
आशिक़ी
तुमको
पकड़
में
कर
चुकी
है
- Subrat Tripathi
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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कहाँ
है
तू
कि
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐ
दोस्त
तमाम
रात
सुलगते
हैं
दिल
के
वीराने
Nasir Kazmi
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दफ़्तर
में
तय
किया
था
कि
तारे
गिनेंगे
आज
लेकिन
हमें
पहुंचते
ही
घर
नींद
आ
गई
Balmohan Pandey
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हर
एक
रात
को
महताब
देखने
के
लिए
मैं
जागता
हूँ
तिरा
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Azhar Inayati
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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चराग़ों
को
आँखों
में
महफ़ूज़
रखना
बड़ी
दूर
तक
रात
ही
रात
होगी
Bashir Badr
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किसी
की
याद
में
इतना
मरा
हूँ
किसी
की
याद
अब
आती
नहीं
है
Subrat Tripathi
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लिखेंगे
गीत
एक
'आशिक़
सभी
जो
गुनगुनाएँगे
उसे
सुनकर
तुम्हें
फिर
और
फिर
हम
और
चाहेंगे
Subrat Tripathi
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तुम
सेे
बिछड़े
कई
महीने
बीत
गए
हैं
मगर
तुम्हारा
नंबर
अब
तक
सेव
रखा
है
Subrat Tripathi
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तेरे
शहर
में
एक
मकाँ
ऐसा
भी
बसता
है
जिसके
हर
ज़र्रे
में
तेरी
यादें
पसरी
हैं
Subrat Tripathi
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ख़ुदा
की
दी
हुई
नेमत
लकीरें
हाथ
में
सब
है
तुम्हीं
को
छोड़कर
के
बस
हमारे
साथ
में
सब
है
कहे
थे
हाथ
मेरे
देखकर
के
इक
नज़ूमी
ने
कि
मेरे
भाग्य
में
कुछ
भी
नहीं
पर
हाथ
में
सब
है
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Subrat Tripathi
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