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Govind kumar
waqt rahte tujhe bat
waqt rahte tujhe bat | वक़्त रहते तुझे बताना था
- Govind kumar
वक़्त
रहते
तुझे
बताना
था
हमको
तेरे
क़रीब
आना
था
- Govind kumar
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आज
भी
'प्रेम'
के
और
'कृष्ण'
के
अफ़्साने
हैं
आज
भी
वक़्त
की
जम्हूरी
ज़बाँ
है
उर्दू
Ata Abidi
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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हम
तो
सुनते
थे
कि
मिल
जाते
हैं
बिछड़े
हुए
लोग
तू
जो
बिछड़ा
है
तो
क्या
वक़्त
ने
गर्दिश
नहीं
की
Ambreen Haseeb Ambar
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उस
वक़्त
का
हिसाब
क्या
दूँ
जो
तेरे
बग़ैर
कट
गया
है
Ahmad Nadeem Qasmi
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तब
हम
दोनों
वक़्त
चुरा
कर
लाते
थे
अब
मिलते
हैं
जब
भी
फ़ुर्सत
होती
है
Javed Akhtar
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तुम्हारे
साथ
इतना
ख़ूब-सूरत
वक़्त
गुज़रा
है
तुम्हारे
बाद
हाथों
में
घड़ी
अच्छी
नहीं
लगती
Madhyam Saxena
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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आँख
में
तो
रखा
पर
बहाएा
नहीं
दर्द
अपना
था
कोई
पराया
नहीं
आपसे
तो
मुहब्बत
में
ग़म
ही
मिला
दिल
ने
फिर
भी
तुझे
जाँ
भुलाया
नहीं
इक
दफ़ा
देखा
था
उसको
हँसते
हुए
फिर
कोई
दूसरा
हमको
भाया
नहीं
जब
ज़रूरत
हुई
ख़्वाहिशें
मार
दी
बेचकर
ख़्वाब
चूल्हा
जलाया
नहीं
बाद
तेरे,
हमें
ख़ुद
का
चेहरा
सनम
याद
करने
से
भी
याद
आया
नहीं
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Govind kumar
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फासले
इतने
भी
हम
सेे
न
बनाये
कोई
हम
सेे
झूठा
ही
सही
प्यार
जताये
कोई
Govind kumar
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तुम
बिछड़कर
मुस्कराना
चाहती
हो
यानी
मुफ़लिस
से
ख़ज़ाना
चाहती
हो
Govind kumar
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जो
भी
इक
बार
बिछड़े
इस
जहाँ
में,
फिर
कभी
मिलते
नहीं
संसार
मेला
है
Govind kumar
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तब
तक
रीत
निभाई
हमने
जब
तक
जाँ
न
गवाई
हमने
जिसको
दिल
से
अपना
माना
मात
उसी
से
खाई
हमने
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Govind kumar
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