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Govind kumar
tab tak reet nibhaai hamne
tab tak reet nibhaai hamne | तब तक रीत निभाई हमने
- Govind kumar
तब
तक
रीत
निभाई
हमने
जब
तक
जाँ
न
गवाई
हमने
जिसको
दिल
से
अपना
माना
मात
उसी
से
खाई
हमने
- Govind kumar
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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बस
यूँँ
ही
मेरा
गाल
रखने
दे
मेरी
जान
आज
गाल
पर
अपने
Jaun Elia
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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कहाँ
तक
साथ
दोगी
तुम
हमारा
सनम
जावेदाँ
है
यह
ग़म
हमारा
Avtar Singh Jasser
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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हल्की-हल्की
सी
हँसी,
साफ
इशारा
भी
नहीं
जान
भी
ले
गए
और,
जान
से
मारा
भी
नहीं
Sawan Shukla
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इश्क़
में
फेर-बदल
आता
है
जब
कोई
एक
बदल
जाता
है
आपकी
सारी
कहानी
सच्ची
पर
मुझें
झूठ
समझ
आता
है
रोने
लग
जाते
है
तेरे
'आशिक़
तू
तरस
फिर
भी
नहीं
खाता
है
वो
है
कैसा
न
बताओ
मुझकों
उसका
सुनके
ही
जी
घबराता
है
ये
कहानी
है
उसी
लड़के
की
आज
जो
नींद
में
चिल्लाता
है
हो
गई
हैं
वही
हालत
मेरी
जिस
में
बच
कोई
नहीं
पाता
है
आँख
कहती
हैं
कि
काजल
डालो
दिल
लहू
लेने
चला
जाता
है
ग़म
भुलाना
भी
है
इक
फ़न
लेकिन
ये
हुनर
सब
को
कहाँ
आता
है
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Govind kumar
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कमाई
इक
नहीं
ख़र्चा
हज़ारों
का
बहुत
मुश्किल
यहाँ
पे
घर
चलाना
है
Govind kumar
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इक
दिल
बना
रहता
था
मेरे
हाथ
पर
वो
आज
भी
पहली
मुहब्बत
याद
है
Govind kumar
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तेरे
बिन
दिल
उदास
रहता
है
इसलिए
तेरे
पास
रहता
है
Govind kumar
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दिल
ने
फिर
जाँ
किसी
को
पुकारा
नहीं
हमने
जब
से
कहा
तू
हमारा
नहीं
एक
सच
ये
भी
है
हम
नहीं
है
तिरे
एक
सच
ये
भी
है
तू
हमारा
नहीं
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Govind kumar
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