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Govind kumar
dosti hamne tumse puraani rakhi
dosti hamne tumse puraani rakhi | दोस्ती हमने तुम सेे पुरानी रखी
- Govind kumar
दोस्ती
हमने
तुम
सेे
पुरानी
रखी
कोई
चाहत
न
अब
ख़ानदानी
रखी
बस
रखा
नाम
लब
पर
हमेशा
तिरा
दिल
में
इक
भी
न
तेरी
निशानी
रखी
- Govind kumar
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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सीने
लगाऊँ
ग़ैर
को
तो
पूछता
है
दिल
किसकी
जगह
थी
और
ये
सीने
पे
कौन
है
Ankit Maurya
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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ये
ऐसा
क़र्ज़
है
जो
मैं
अदा
कर
ही
नहीं
सकता
मैं
जब
तक
घर
न
लौटूँ
मेरी
माँ
सज्दे
में
रहती
है
Munawwar Rana
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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जिस
सेे
डरता
हूँ
वही
होता
है
क्यूँ
मेरे
साथ
यही
होता
है
Govind kumar
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ये
ही
मेरी
ख़ूबी
थी
कल
शाम
तक
भूल
जाते
थे
किसी
का
नाम
तक
Govind kumar
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अपने
दिल
के
क़त्ल
की
सारी
कहानी
याद
है
उसका
चेहरा
अब
भी
मुझको
मुँह
ज़ुबानी
याद
है
Govind kumar
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हमें
भी
हिज्र
में
आराम
जब
आया
तिरे
लब
पर
कोई
और
नाम
जब
आया
Govind kumar
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धूप
जब
छुप
गई
पेड़
की
छाँव
से
चलना
आसाँ
हुआ
अब
ज़रा
पाँव
से
मौत
आ
जाएगी
सच
में
उस
दिन
मुझे
तू
चली
जाएगी
जब
मिरे
गाँव
से
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Govind kumar
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