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Prakamyan Gautam
tanhaaii men jeena pad jaa.e tumko bhi
tanhaaii men jeena pad jaa.e tumko bhi | तन्हाई में जीना पड़ जाए तुमको भी
- Prakamyan Gautam
तन्हाई
में
जीना
पड़
जाए
तुमको
भी
ख़ल्वत
की
रात
सताए
तुमको
सब
की
सब
- Prakamyan Gautam
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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तन्हाई
ये
तंज
करे
है
तन्हा
क्यूँ
है
यार
कहाँ
है
आगे
पीछे
चलने
वाले
Vishal Singh Tabish
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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इस
ख़ौफ़
में
कि
ख़ुद
न
भटक
जाएँ
राह
में
भटके
हुओं
को
राह
दिखाता
नहीं
कोई
Anwar Taban
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
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रौशन
होते
होते
रह
जाता
हूँ
मैं
मिलने
से
पहले
ढह
जाता
हूँ
Prakamyan Gautam
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चाँद
निकल
आता
था
खिड़की
पर
मेरी
वो
जब
भी
अपनी
खिड़की
पर
आता
था
Prakamyan Gautam
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तुम
सेे
बेहतर
क्या
रब
होता
होगा?
तुम
कहती
हो
मतलब
होता
होगा
Prakamyan Gautam
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कोई
मिलता
तो
उसको
बतलाते
इतने
रस्ते
कोई
साथ
नहीं
था
Prakamyan Gautam
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पहले
करके
पागल
हमको
अच्छा
है
ये
पागल
कहना
Prakamyan Gautam
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