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Gaurav Singh
ye ghadi vo vaqt laati hi nahin jab ham milenge
ye ghadi vo vaqt laati hi nahin jab ham milenge | ये घड़ी वो वक़्त लाती ही नहीं जब हम मिलेंगे
- Gaurav Singh
ये
घड़ी
वो
वक़्त
लाती
ही
नहीं
जब
हम
मिलेंगे
आप
ही
हमको
बताएँ
क्या
करें
पहनें-उतारें
- Gaurav Singh
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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जो
ज़रा
ठीक
से
किरदार
निगारी
हो
जाए
ये
कहानी
तो
हक़ीक़त
पे
भी
तारी
हो
जाए
तेरे
हामी
है
सो
उठ
कर
भी
नहीं
जा
सकते
जाने
किस
वक़्त
यहाँ
राय-शुमारी
हो
जाए
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Khurram Afaq
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आँख
से
दूर
न
हो
दिल
से
उतर
जाएगा
वक़्त
का
क्या
है
गुज़रता
है
गुज़र
जाएगा
Ahmad Faraz
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कुछ
कहने
का
वक़्त
नहीं
ये
कुछ
न
कहो
ख़ामोश
रहो
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
हाँ
ऐ
लोगों
ख़ामोश
रहो
Ibn E Insha
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उस
ने
इस
तरह
से
बदला
है
रवय्या
अपना
पूछना
पड़ता
है
हर
वक़्त,
तुम्हीं
हो
ना
दोस्त?
Inaam Azmi
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वक़्त
के
पास
हैं
कुछ
तस्वीरें
कोई
डूबा
है
कि
उभरा
देखो
Baqi Siddiqui
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वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त
बर्बाद
कर
के
छोड़ेगा
Divakar Rahi
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उस
वक़्त
का
हिसाब
क्या
दूँ
जो
तेरे
बग़ैर
कट
गया
है
Ahmad Nadeem Qasmi
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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इशारे
कर
रही
है
ज़िंदगी
के
चलो
चलने
का
अपने
वक़्त
आया
Gaurav Singh
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बहुत
छोटे
थे
हम
सब
तो
हमारी
माँ
बताती
थी
महाभारत
का
होना
भी
उसी
गिरधर
की
मर्ज़ी
थी
Gaurav Singh
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कहने
को
मिरा
घर
भी,
जन्नत
है
मगर
इस
में
माँ
बाप
का
कमरा
है,
माँ
बाप
नहीं
मेरे
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Gaurav Singh
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जहाँ
छीना
गया
कासा
हमारा
वहीं
पर
चल
गया
सिक्का
हमारा
भला
अब
और
क्या
माँगे
ख़ुदास
किसी
को
मिल
गया
माँगा
हमारा
अभी
भी
याद
है
पहली
मुहब्बत
बहुत
मशहूर
था
क़िस्सा
हमारा
हमारी
मुश्किलों
पे
बात
करिए
पलट
के
देखिए
जूता
हमारा
हमारे
दिन
भी
अच्छे
हो
रहे
थे
किसी
को
चुभ
गया
खिलना
हमारा
हमारा
वक़्त
भी
आएगा
लोगों
तुम्हारे
तीन
दिन
चौथा
हमारा
हमारे
बोसे
से
नाराज़
है
तो
हमें
लौटा
दे
तूँ
बोसा
हमारा
दु'आ
है
अपने
बच्चे
जब
बड़े
हों
तुम्हारी
हीर
हो
राँझा
हमारा
किसे
कैसे
कहाँ
बदनाम
कर
दें
इसी
में
रह
गया
कुनबा
हमारा
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Gaurav Singh
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मेरे
मालिक
ये
क्या
किया
तुमने
सर
से
साया
हटा
दिया
तुमने
याद
आने
लगा
है
क्यूँ
कोई
क्या
पिलाया
है
साक़िया
तुमने
वो
भी
रावण
निकल
गए
जिनको
यार
समझा
था
औलिया
तुमने
एक
मुझ
सेे
ही
हो
ख़फ़ा
वरना
कैसे
कैसों
को
दिल
दिया
तुमने
हो
गई
शा'इरी
ग़ज़ब
तुम
सेे
ले
लिया
दुख
का
क़ाफ़िया
तुमने
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Gaurav Singh
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