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"Dharam" Barot
taalaab ka paani raha hai sookh dekho ik taraf
taalaab ka paani raha hai sookh dekho ik taraf | तालाब का पानी रहा है सूख देखो इक तरफ़
- "Dharam" Barot
तालाब
का
पानी
रहा
है
सूख
देखो
इक
तरफ़
कोई
समुंदर
को
बना
मीठा
रहा
है
इक
तरफ़
- "Dharam" Barot
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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किसी
के
होठ
समुंदर
में
भी
तरसते
रहे
किसी
की
प्यास
को
सहरा
में
मिल
गया
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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उड़ाने
पर
जो
आ
जाऊँ
उड़ा
दूँ
होश
दुनिया
के
मगर
मैं
फूल
से
तितली
उड़ा
सकता
नहीं
यारों
Divy Kamaldhwaj
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मुलाक़ात
का
वा'दा
कर
के
मुकर
जा
किसी
और
का
होके
तो
तू
सुधर
जा
मैं
तन्हाई
को
चाहता
हूँ
मेरे
पास
मेरा
मान
रख-कर
सनम
अपने
घर
जा
नए
झूठ
हर
रोज़
ही
बोलना
और
तू
ऐसे
ही
मेरी
नज़र
से
उतर
जा
किसी
बात
पर
जल्द
बाज़ी
नहीं
रे
ज़रा
सोच
आराम
से
फिर
ठहर
जा
हुकुम
का
ये
इक्का
नहीं
आता
अब
काम
सभी
ने
रखें
पाल
जोकर
जिधर
जा
दिखाए
कोई
अपना
जब
रास्ता
सर्द
'धरम'
रास्ता
सर्द
है
भूल
कर
जा
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"Dharam" Barot
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थी
कुछ
से
प्रीति
था
कुछ
से
हमारा
बैर
कभी
अपना
कभी
अपना
बना
था
ग़ैर
कठिन
हर
रास्ता
मंज़िल
दिखाएगा
मिलेगी
क़ामयाबी
तुम
चलाओ
पैर
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"Dharam" Barot
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मेरी
ग़ज़ल
में
दोष
मिल
ही
जाने
थे
दावा
नहीं
अब
तक
किया
शायर
हूँ
मैं
"Dharam" Barot
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दिखी
थी
मुझको
इक
लड़की
अकेली
नहीं
थी
उसकी
कोई
भी
सहेली
नज़र
उसपर
थी
बहुतों
की
मगर
वो
बनी
थी
वास्ते
सबके
पहेली
जुटाकर
ढेर
सी
हिम्मत
कहा
था
रखो
इस
हाथ
पर
अपनी
हथेली
बना
था
रंक
उसका
साथ
देने
नहीं
था
रंज
छोड़ी
थी
हवेली
करेगी
चूल्हा
चरखा
कुछ
दिनों
में
मनाने
दो
ख़ुशी
दुल्हन
नवेली
बने
मीरा
बने
राधा
बने
सबरी
नहीं
था
जिस्म
इन
सब
में
सहेली
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"Dharam" Barot
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भरोसा
वक़्त
से
ज़्यादा
तुम्हारा
बिना
सोचे
हो
जाना
था
हमारा
किसी
के
वास्ते
रुकता
नहीं
मैं
रखा
जो
रोककर
फिर
मैं
तुम्हारा
भले
बदनाम
तेरे
नाम
से
था
लगा
अच्छा
मिला
तेरा
सहारा
मेरे
जितनी
मोहब्बत
कौन
करता
रखा
है
पास
सबने
वहम
प्यारा
दु'आओं
को
भी
लगती
बद्दुआ
जब
हमारे
वास्ते
कुछ
होगा
न्यारा
पता
था
दोस्त
बोले
जा
रहा
झूठ
पता
था
है
मुसीबत
से
वो
मारा
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