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"Dharam" Barot
dikhi thii mujhko ik ladki akeli
dikhi thii mujhko ik ladki akeli | दिखी थी मुझको इक लड़की अकेली
- "Dharam" Barot
दिखी
थी
मुझको
इक
लड़की
अकेली
नहीं
थी
उसकी
कोई
भी
सहेली
नज़र
उसपर
थी
बहुतों
की
मगर
वो
बनी
थी
वास्ते
सबके
पहेली
जुटाकर
ढेर
सी
हिम्मत
कहा
था
रखो
इस
हाथ
पर
अपनी
हथेली
बना
था
रंक
उसका
साथ
देने
नहीं
था
रंज
छोड़ी
थी
हवेली
करेगी
चूल्हा
चरखा
कुछ
दिनों
में
मनाने
दो
ख़ुशी
दुल्हन
नवेली
बने
मीरा
बने
राधा
बने
सबरी
नहीं
था
जिस्म
इन
सब
में
सहेली
- "Dharam" Barot
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वो
अक़्ल-मंद
कभी
जोश
में
नहीं
आता
गले
तो
लगता
है
आग़ोश
में
नहीं
आता
Farhat Ehsaas
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हवा
ख़फ़ा
थी
मगर
इतनी
संग-दिल
भी
न
थी
हमीं
को
शमा
जलाने
का
हौसला
न
हुआ
Qaisar-ul-Jafri
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ज़माना
इश्क़
के
मारों
को
मात
क्या
देगा
दिलों
के
खेल
में
ये
जीत
हार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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इस
आरज़ी
दुनिया
में
हर
बात
अधूरी
है
हर
जीत
है
ला-हासिल
हर
मात
अधूरी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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जिसे
मंज़िल
बताया
जा
रहा
था
वो
रस्ते
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
है
Atul K Rai
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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ऐसा
नहीं
कि
उन
से
मोहब्बत
नहीं
रही
जज़्बात
में
वो
पहली
सी
शिद्दत
नहीं
रही
Khumar Barabankvi
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फ़ैसला
कौन
सा
ज़िंदगी
का
सही
सच
यही
तुझ
में
तू
मुझ
में
मैं
था
सही
आप
मेरी
बुराई
करोगे
मगर
फ़ायदा
उस
सेे
हो
तो
बताना
सही
कौन
सा
झूठ
ये
शा'इरी
में
कहाँ
ख़ुद
बताएगी
ये
शा'इरी
क्या
सही
मैं
नसीहत
हमेशा
दिया
करता
हूँ
आप
ख़ुद
तय
करे
है
ग़लत
या
सही
दुख
का
कोई
ठिकाना
बताना
मुझे
देख
कमज़ोर
पर
वार
होगा
सही
रूह
को
क्यूँ
रख
दिया
ऑप्शन
में
'धरम
जिस्म
का
सौदा
कैसे
लगा
था
सही
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"Dharam" Barot
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हर
पान
जब
घनश्याम
सा
लगने
लगे
पर्यावरण
तब
गोपिका
लगने
लगे
"Dharam" Barot
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साल
भर
तक
घूमते
हैं
हर
गली
में
इश्क़
उनको
याद
आया
फरवरी
में
जानू
सानू
ये
भी
होगा
कुछ
दिनों
तक
इश्क़
कर
देते
हैं
पूरा
फरवरी
में
सोच
लो
दस
बार
फिर
करना
हाँ
या
ना
फरवरी
मतलब
नहीं
रहना
हरी
में
इश्क़
करने
वाले
करते
ही
रहेंगे
इश्क़
कैसे
सिर्फ़
होगा
फरवरी
में
ये
गिले-शिकवे
नहीं
कुछ
काम
के
यार
कर
मज़े
तू
भी
धरम
कुछ
ज़िंदगी
में
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"Dharam" Barot
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ज़मीं
को
देखने
आए
हो
बैठो
नई
उम्मीद
भी
लाए
हो
बैठो
है
सूना
गाँव
का
हर
इक
मुहल्ला
सुना
है
शहर
में
छाए
हो
बैठो
नया
घर
है
नई
गाड़ी
ये
सब
ठीक
सुकूँ
भी
क्या
ज़रा
पाए
हो
बैठो
नहीं
कोई
जहाँ
पर
खेलते
थे
यहाँ
सन्नाटे
में
आए
हो
बैठो
यही
जगदीश
में
था
घर
तुम्हारा
'धरम'
फिर
लौट
कर
आए
हो
बैठो
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सभी
रूठते
जब
निभाता
मेरा
साथ
ज़मींदोज़
होता
नहीं
दोस्त
सच्चा
"Dharam" Barot
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Akbar Allahabadi
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Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
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