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"Dharam" Barot
zindagi bhar saath achchhii baat hai ye
zindagi bhar saath achchhii baat hai ye | ज़िंदगी भर साथ अच्छी बात है ये
- "Dharam" Barot
ज़िंदगी
भर
साथ
अच्छी
बात
है
ये
छूट
जाता
साथ
सच्ची
बात
है
ये
दिन
हमारे
खा
गई
रातों
की
ये
जॉब
रोशनी
में
रात
कैसी
बात
है
ये
यार
तुझ
पर
है
भरोसा
सो
कहाँ
कुछ
ध्यान
रखना
यार
अपनी
बात
है
ये
ज़िंदगी
भर
हो
उदासी
बात
झूठी
पल
को
जी
लो
तुम
ख़ुशी
की
बात
है
ये
ये
सितारा
टूटता
बस
इक
भरम
है
हो
भरोसा
रब
पे
अच्छी
बात
है
ये
- "Dharam" Barot
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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तेरी
ख़ुशियों
का
सबब
यार
कोई
और
है
ना
दोस्ती
मुझ
सेे
है
और
प्यार
कोई
और
है
ना
Ali Zaryoun
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यार
बिछड़कर
तुमने
हँसता
बसता
घर
वीरान
किया
मुझको
भी
आबाद
न
रक्खा
अपना
भी
नुक़्सान
किया
Ali Zaryoun
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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कभी
अल्लाह
मियाँ
पूछेंगे
तब
उनको
बताएँगे
किसी
को
क्यूँ
बताएँ
हम
इबादत
क्यूँ
नहीं
करते
Farhat Ehsaas
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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रुख़्सार
का
दे
शर्त
नहीं
बोसा-ए-लब
से
जो
जी
में
तिरे
आए
सो
दे
यार
मगर
दे
Maatam Fazl Mohammad
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ख़ुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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ज़मीं
को
देखने
आए
हो
बैठो
नई
उम्मीद
भी
लाए
हो
बैठो
है
सूना
गाँव
का
हर
इक
मुहल्ला
सुना
है
शहर
में
छाए
हो
बैठो
नया
घर
है
नई
गाड़ी
ये
सब
ठीक
सुकूँ
भी
क्या
ज़रा
पाए
हो
बैठो
नहीं
कोई
जहाँ
पर
खेलते
थे
यहाँ
सन्नाटे
में
आए
हो
बैठो
यही
जगदीश
में
था
घर
तुम्हारा
'धरम'
फिर
लौट
कर
आए
हो
बैठो
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"Dharam" Barot
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साथ
चलने
वाले
सारे
रुक
गए
थे
ज़िंदगी
को
जल्द
जाना
था
जिन्होंने
"Dharam" Barot
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न
रामायण
का
मकसद
राम
को
सबको
बताना
था
हाँ
रामायण
का
मकसद
राम
हर
घर
में
बनाना
था
"Dharam" Barot
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औरों
ने
जी
भर
किया
बर्बाद
मुझको
आप
ही
से
होना
था
आबाद
मुझको
हिज्र
का
कोई
इरादा
भी
नहीं
है
क़ैद
करके
मत
करे
आज़ाद
मुझको
बंदगी
इक
नाम
की
करता
रहूँगा
इश्क़
में
इक
दिन
मिलेगी
दाद
मुझको
वास्ते
हाज़िर
रहूँगा
आप
के
मैं
आप
कर
सकते
कभी
भी
याद
मुझको
मेरी
ग़ज़लों
को
जभी
वो
गुनगुनाती
लग
रहा
था
दे
रही
है
साद
मुझको
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"Dharam" Barot
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सबका
लिखा
सब
अच्छा
सब
के
वास्ते
मुमकिन
नहीं
सबको
मिलेंगे
मन
मुताबिक़
रास्ते
मुमकिन
नहीं
"Dharam" Barot
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