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"Dharam" Barot
auron ne jee bhar kiya barbaad mujhko
auron ne jee bhar kiya barbaad mujhko | औरों ने जी भर किया बर्बाद मुझको
- "Dharam" Barot
औरों
ने
जी
भर
किया
बर्बाद
मुझको
आप
ही
से
होना
था
आबाद
मुझको
हिज्र
का
कोई
इरादा
भी
नहीं
है
क़ैद
करके
मत
करे
आज़ाद
मुझको
बंदगी
इक
नाम
की
करता
रहूँगा
इश्क़
में
इक
दिन
मिलेगी
दाद
मुझको
वास्ते
हाज़िर
रहूँगा
आप
के
मैं
आप
कर
सकते
कभी
भी
याद
मुझको
मेरी
ग़ज़लों
को
जभी
वो
गुनगुनाती
लग
रहा
था
दे
रही
है
साद
मुझको
- "Dharam" Barot
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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एक
मुद्दत
से
परिंदे
की
तरह
ये
क़ैद
है
रूह
मेरे
जिस्म
से
'क़ासिद'
रिहा
होती
नहीं
Gurbir Chhaebrra
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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मेरी
बाँहों
में
बहकने
की
सज़ा
भी
सुन
ले
अब
बहुत
देर
में
आज़ाद
करूँँगा
तुझ
को
Jaun Elia
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मुन्सिफ़
हो
अगर
तुम
तो
कब
इंसाफ़
करोगे
मुजरिम
हैं
अगर
हम
तो
सज़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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तेरी
आँखों
के
लिए
इतनी
सज़ा
काफ़ी
है
आज
की
रात
मुझे
ख़्वाब
में
रोता
हुआ
देख
Abhishek shukla
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तस्वीर
में
जो
क़ैद
था
वो
शख़्स
रात
को
ख़ुद
ही
फ़्रेम
तोड़
के
पहलू
में
आ
गया
Adil Mansuri
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आज
पैवंद
की
ज़रूरत
है
ये
सज़ा
है
रफ़ू
न
करने
की
Fahmi Badayuni
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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वो
नादाँ
है
उसे
मेरे
अलावा
दुनिया
दिखती
है
मैं
पागल
हूँ
मुझे
उसके
अलावा
कुछ
नहीं
दिखता
"Dharam" Barot
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सभी
की
अपनी
ख़ूबी
अपनी
ख़ामी
लिखो
पहचान
कर
ख़ुद
की
कहानी
किसी
भी
उम्र
में
ये
काम
आनी
है
वो
ज़िंदादिली
यानी
जवानी
कहानी
इश्क़
में
आते
नहीं
और
सही
है
एक
राजा
एक
रानी
अलावा
इसके
घू
मेंगे
कहाँ
पर
चलो
कश्मीर
से
कन्या
कुमारी
क़सम
खाने
से
झूठी
मैं
मरूँगा
मरोगी
तुम
नज़र
में
ऐसे
मेरी
मोहब्बत
पल
में
मिल
जाती
किसी
को
किसी
ने
ज़िंदगी
सारी
गँवानी
गया
था
घर
से
ना-उम्मीद
कोई
नहीं
करनी
थी
बातें
ये
हवाई
पता
चल
जाता
ये
रूठी
है
क़ुदरत
यकायक
जब
हो
जाती
है
तबाही
मुसीबत
में
नहीं
था
साथ
कोई
बनानी
थी
"धरम"
ख़ुद
की
दवाई
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"Dharam" Barot
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झूठी
क़सम
से
तो
मरूँगा
मैं
नहीं
मरना
तुझे
ही
है
नज़र
में
बस
मेरी
"Dharam" Barot
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हाँ
दूल्हे
को
भी
था
शृंगार
का
दुख
ये
औरत
का
तो
है
हर
बार
का
दुख
नहीं
रुकती
कभी
इच्छा
की
यात्रा
ये
बाइक
बाद
आता
कार
का
दुख
बताएँगे
सभी
क्या
थी
कमी
पर
खिलाड़ी
जानता
है
हार
का
दुख
फ़साना
लगता
है
आसान
जिनको
पड़ेगा
झेलना
इनकार
का
दुख
फ़क़त
इज़हार
करना
है
तुम्हें
यार
उन्हें
है
झेलना
इक़रार
का
दुख
दिया
हम
सबको
था
सालों
से
ही
बाँट
मज़े
है
फिर
भी
है
सरकार
का
दुख
अभी
ये
हाल
है
जो
मीडिया
का
कभी
होता
था
वो
अख़बार
का
दुख
निकालों
तुम
कमी
हर
दिन
हमारी
रखो
मत
पास
मैं
के
भार
का
दुख
तेरी
बातें
कहाँ
समझे
'धरम'
लोग
नया
होता
नए
फ़नकार
का
दुख
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"Dharam" Barot
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हमें
बस
रुत्बा
क़ाएम
करना
होता
इसी
चक्कर
में
तुम
पर
मरना
होता
हमारे
गाँव
में
पहले
यहाँ
पर
बड़ा
ही
ख़ूब-सूरत
झरना
होता
बताना
नास्तिक
ख़ुद
को
भरम
बस
उसे
भी
बिन
बताए
डरना
होता
इसी
डर
ने
बुरा
बनने
से
रोका
सभी
को
अच्छा
बन
कर
मरना
होता
हो
आमद
जब
अठन्नी
खर्चा
रुपिया
लिया
है
क़र्ज़
कैसे
भरना
होता
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