kisi kii chaah ruk jaati hai tan tak | किसी की चाह रुक जाती है तन तक

  - "Dharam" Barot
किसीकीचाहरुकजातीहैतनतक
किसीकोसाथउड़नाहैगगनतक
कीथीख़्वाहिशसभीकीजिसनेपूरी
रखीथीअपनीख़्वाहिशअपनेमनतक
कमानेमेंफँसाहूँऐसेमैंयार
अकेलीरूहजाएगीवतनतक
कहाथानागुमाँमेंउसनेमुझको
तभीयेबातपहुँचीहैजलनतक
छेड़ोदर्दकोमेरेज़ियादा
धरमइसबातकोरहनेदोफ़नतक
  - "Dharam" Barot
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