KHud ko adhoora maanne lagte ho dost | ख़ुद को अधूरा मानने लगते हो दोस्त

  - "Dharam" Barot
ख़ुदकोअधूरामाननेलगतेहोदोस्त
तबकहताहूँमैंयेतुम्हेंपूरेहोदोस्त
जिस्मोंकीबारीकीबतादेतेहोदोस्त
क्यारूहकोअपनाबनासकतेहोदोस्त
तक़दीरअपनीचलगईचलनीथीवो
हमसेेपूछोयेकीअबकैसेहोदोस्त
घरगाँवसबकुछछूटजातामानापर
कुछवक़्ततकभीघरनहींआतेहोदोस्त
येआख़िरीथायुद्धकरनेकाविकल्प
पहलेहीपन्नेक्यूँसिखादेतेहोदोस्त
  - "Dharam" Barot
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