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"Dharam" Barot
saamne vaala galat lagta tha mujhko koi bhi jab
saamne vaala galat lagta tha mujhko koi bhi jab | सामने वाला ग़लत लगता था मुझको कोई भी जब
- "Dharam" Barot
सामने
वाला
ग़लत
लगता
था
मुझको
कोई
भी
जब
रखता
था
ख़ुद
को
जगह
उसकी
हो
जाता
था
सही
तब
इसका
मतलब
ये
नहीं
कोई
ग़लत
होता
नहीं
यार
आदमी
क्या
ग़लती
करने
को
बनाया
था
मुझे
रब
- "Dharam" Barot
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हमारे
दरमियाँ
जो
प्यार
से
पहले
की
यारी
थी
बिछड़
कर
अब
ये
लगता
है
वो
यारी
ज़्यादा
प्यारी
थी
बिछड़ना
उसकी
मर्ज़ी
थी,
उसे
उतरन
न
कहना
तुम
वो
अब
उतनी
ही
उसकी
है
वो
तब
जितनी
तुम्हारी
थी
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Alankrat Srivastava
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मुझ
सेे
पहले
कोई
रंग
लगाए
उनको
कैसे
सह
लें
यार
भला
ये
होली
में
हम
Priya Dixit
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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बादलों
में
से
छनता
हुआ
नूर
देख
ऐसी
रौशन
जबीं
है
मेरे
यार
की
Afzal Ali Afzal
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इस
से
पहले
कि
बे-वफ़ा
हो
जाएँ
क्यूँँ
न
ऐ
दोस्त
हम
जुदा
हो
जाएँ
Ahmad Faraz
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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अब
दोस्त
कोई
लाओ
मुक़ाबिल
में
हमारे
दुश्मन
तो
कोई
क़द
के
बराबर
नहीं
निकला
Munawwar Rana
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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मान
कर
मत
बैठ
तू
कमज़ोर
है
देख
कर
करतब
कहेंगे
मोर
है
मार
कर
ख़ंजर
चला
जा
पीठ
पर
लोग
कहते
भी
हैं
तू
कमज़ोर
है
याद
कर
वो
वार
पहला
पीठ
का
कह
रहा
है
तू
ये
तुझ
में
ज़ोर
है
ग़लती
का
एहसास
अच्छे
से
तुझे
दिख
रहा
है
तेरे
मन
में
चोर
है
ज़िंदगी
मतलब
यही
है
मेरे
दोस्त
है
उजाला
साथ
में
घनघोर
है
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"Dharam" Barot
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सियासत
वालों
से
ये
चोट
खाई
है
कभी
आवाज़
ख़ुद
की
भी
उठाई
है
दिए
को
तो
बुझा
देती
हवा
पल
में
हुआ
जो
आग
देने
साथ
आई
है
उसे
मैं
भूल
जाऊँगा
मगर
कैसे
वो
आकर
के
मेरे
अंदर
समाई
है
सुकूँ
को
मार
दो
गोली
जवानी
में
अभी
प्रायोरिटी
पर
बस
कमाई
है
ज़रा
बेहतर
बनाने
के
ही
चक्कर
में
धरम
ये
ज़िंदगी
सारी
गवाई
है
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"Dharam" Barot
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न
रामायण
का
मकसद
राम
को
सबको
बताना
था
हाँ
रामायण
का
मकसद
राम
हर
घर
में
बनाना
था
"Dharam" Barot
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वो
ख़ुद
को
शे'र
माने
बैठा
देखो
बताओ
ज़िन्दगी
सर्कस
है
उसको
"Dharam" Barot
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प्रेम
प्लेटोनिक
है
समझा
ही
नहीं
जिस्म
छूना
प्रेम
उसका
तो
फ़क़त
"Dharam" Barot
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