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Dharamraj deshraj
zindagi tu aazm
zindagi tu aazm | ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे
- Dharamraj deshraj
ज़िन्दगी
तू
आज़माना
छोड़
दे
मौत
से
कह
दे
बहाना
छोड़
दे
फूँकने
के
काम
वो
आता
मकाँ
जब
परिन्दा
आशियाना
छोड़
दे
यार
क़िस्मत
से
भी
भागा
है
कोई
बेसबब
आँसू
बहाना
छोड़
दे
छोड़
दूँ
उसकी
गली
उसका
नगर
वो
मिरे
ख़्वाबों
में
आना
छोड़
दे
यार
तू
माता-पिता
को
रब
समझ
हर
कहीं
भी
सर
झुकाना
छोड़
दे
फूल
के
बदले
जहाँ
काँटे
मिलें
ऐसे
तू
रिश्ते
निभाना
छोड़
दे
चाँद
पाने
के
लिए
नादाँ
'धरम'
हो
सके
तो
कसमसाना
छोड़
दे
- Dharamraj deshraj
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उसको
भी
उसकी
बाँहों
में
सोना
होगा
सोना
ही
है
रिश्तों
की
भी
मजबूरी
है
Umesh Maurya
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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कौन
सी
दीवार
है
मौजूद
इस
रिश्ते
में
'साज़'
क्यूँँ
नहीं
रो
सकते
हम
अपने
पिता
के
सामने
Siddharth Saaz
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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किस
वास्ते
लिक्खा
है
हथेली
पे
मिरा
नाम
मैं
हर्फ़-ए-ग़लत
हूँ
तो
मिटा
क्यूँँ
नहीं
देते
Hasrat Jaipuri
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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वक़्त
के
बन
ग़ुलाम
हम
सारे
नक़्शे-पा
अपने
छोड़
जाते
हैं
Dharamraj deshraj
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ख़ुदास
देखिये
फ़रियाद
करके
सुकूँ
दिल
को
मिलेगा
याद
करके
ग़मों
से
अपना
दिल
आबाद
करके
मज़ा
आने
लगा
रूदाद
करके
दुआएँ
पुरअसर
हमको
मिलेंगी
किसी
मज़लूम
की
इमदाद
करके
बिमारी
भूलने
की
छोड़
भी
जा
भुला
देना
हमें
तू
याद
करके
लहू
आँखों
का
गंगाजल
लगेगा
कभी
देखो
उसे
आज़ाद
करके
हमारे
पास
है
ग़म
का
ख़ज़ाना
मिलेगा
क्या
हमें
बर्बाद
करके
'धरम'सुख
चीज़
क्या
है
देख
लेना
दिले-नाक़ाम
को
तू
शाद
करके
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Dharamraj deshraj
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कैसे
साबित
करोगे
तुम
ख़ुश
हो
मुस्कुराना
ख़ुशी
नहीं
होती
Dharamraj deshraj
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रेत
को
मुट्ठी
में
भर
कर
तय
करें
मीलों
सफ़र
इस
तरह
ख़ुशियाँ
पहुँचती
हैँ
यहाँ
आवाम
तक
Dharamraj deshraj
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आँखों
में
अश्क
भर
के
कहो
यूँँ
न
अलविदा
एहसान
आँसुओं
का
उठाया
न
जाएगा
Dharamraj deshraj
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