jab main un ke makaan se niklaa | जब मैं उन के मकान से निकला

  - Dharamraj deshraj
जबमैंउनकेमकानसेनिकला
आँखसेख़ूँभीशानसेनिकला
दर्द-ए-दिलबढ़गयामेराहदसे
जानेक्या-क्याज़ुबानसेनिकला
मैंनेकितनेसितमउठाएहैं
रात-दिनइम्तिहानसेनिकला
होगएउसकेनूरकेक़ायल
चाँदजबआसमानसेनिकला
रौशनाईबहुतज़रूरीथी
ख़ूनभीइत्मीनानसेनिकला
फिरकभीलौटकरनहींआया
आदमीजबजहानसेनिकला
ख़ूँमेराअश्क़मेंबदलके'धरम"
शे'रबनकरदिवानसेनिकला
  - Dharamraj deshraj
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