aise aaya hai be-naqaab koi | ऐसे आया है बे-नक़ाब कोई

  - Dard Faiz Khan
ऐसेआयाहैबे-नक़ाबकोई
जैसेनिकलाहोमाहताबकोई
मेरीबाहोंमेंइसतरहआया
शाख़परजिसतरहगुलाबकोई
दिलकहींपरसुकूँनहींपाता
दिलपेउतराहैक्याअज़ाबकोई
मैंहूँनादिमसवालपरअपने
काशआएतिराजवाबकोई
मेरेहिस्सेमेंकुछनहींआता
करनेलगताहैजबहिसाबकोई
सबसेेमिलतेहैंख़ुशमिज़ाजीसे
चाहेअच्छाहोयाख़राबकोई
बे-हयाईकादौरहैसाहब
फिरजलायागयाहिजाबकोई
ज़िंदगानीकेख़्वाबटूटगए
मैंनेदेखाहैजबहुबाबकोई
ज़ुल्महदसेगुज़रगयातेरा
तुझपेआएगाअबइताबकोई
इसतरहदिलहमाराटूटाहै
जिसतरहशाख़सेगुलाबकोई
फ़ैज़केघरवोजबभीआताहै
छोड़जाताहैबसकिताबकोई
  - Dard Faiz Khan
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