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Sarthak Bechen
mirii is aankh men ik khwaab ye hai
mirii is aankh men ik khwaab ye hai | मिरी इस आँख में, इक ख़्वाब ये है
- Sarthak Bechen
मिरी
इस
आँख
में,
इक
ख़्वाब
ये
है
पिता
मेरे,
मुझे
शाइर
कहेंगे
- Sarthak Bechen
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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मुझे
तो
उसका
भीतरी
ग़ुबार
है
निकालना
सो
आँख
चूमता
हूँ
उसके
होंठ
चूमता
नहीं
Siddharth Saaz
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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मुझे
भी
बख़्श
दे
लहजे
की
ख़ुशबयानी
सब
तेरे
असर
में
हैं
अल्फ़ाज़
सब,
म'आनी
सब
मेरे
बदन
को
खिलाती
है
फूल
की
मानिंद
कि
उस
निगाह
में
है
धूप,
छाँव,
पानी
सब
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Subhan Asad
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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तुम
दरिया
हो
सागर
से
मिल
जाओगे
हम
तो
झील
हैं
हमको
ठहरे
रहना
है
Sarthak Bechen
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तुम्हें
मुझ
सेे
जुदा
होना
पड़ेगा
छुपा
नज़रें
हमें
रोना
पड़ेगा
ज़माना,
बीज
नफ़रत
बो
रहा
है
मुहब्बत
का
हमें
बोना
पड़ेगा
नहीं
आती
मुझे
अब
नींद
लेकिन
तेरे
दीदार
को
सोना
पड़ेगा
मैं
हूँ
बेचैन
ये
सबको
ख़बर
है
तुम्हें
भी
चैन
अब
खोना
पड़ेगा
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Sarthak Bechen
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फ़कीरी
मुफ़लिसी
में
ही,
गुज़ारी
ज़िन्दगी
हमने
ग़ज़ल
तेरे
नशे
में
ही,
संँवारी
ज़िन्दगी
हमने
मुहब्बत
छोड़
के
बस
लग
गया
हूँ
शा'इरी
में
अब
फ़क़त
इक
इस
तरीके
से,
सुधारी
ज़िन्दगी
हमने
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Sarthak Bechen
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पुराना
इश्क़
है
मेरा,
उसे
ही
याद
करता
है
उसे
खोने
से
डरता
है,
उसे
पाने
से
डरता
है
तकब्बुर
है
मुझे
इस
बात
पर,
बेचैन
उसका
है
उसी
से
बात
करता
है,
उसी
की
बात
करता
है
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Sarthak Bechen
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परिंदे
की
रिहाई
पर
ख़ुशी
से
झूमते
हैं
सब
क़फ़स
के
दर्द
का
सोचो
घुटन
से
मर
रहा
होगा
Sarthak Bechen
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