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Sarthak Bechen
faqeeri muflisi men hi guzaari zindagi hamne
faqeeri muflisi men hi guzaari zindagi hamne | फ़कीरी मुफ़लिसी में ही, गुज़ारी ज़िन्दगी हमने
- Sarthak Bechen
फ़कीरी
मुफ़लिसी
में
ही,
गुज़ारी
ज़िन्दगी
हमने
ग़ज़ल
तेरे
नशे
में
ही,
संँवारी
ज़िन्दगी
हमने
मुहब्बत
छोड़
के
बस
लग
गया
हूँ
शा'इरी
में
अब
फ़क़त
इक
इस
तरीके
से,
सुधारी
ज़िन्दगी
हमने
- Sarthak Bechen
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तुम
भी
रोती
हुई
दिखाई
दो
मैंने
रोते
हुए
ये
चाहा
था
Vikas Rana
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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हज़ारों
साल
नर्गिस
अपनी
बे-नूरी
पे
रोती
है
बड़ी
मुश्किल
से
होता
है
चमन
में
दीदा-वर
पैदा
Allama Iqbal
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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भूख
है
तो
सब्र
कर,
रोटी
नहीं
तो
क्या
हुआ
आजकल
दिल्ली
में
है
ज़ेर-ए-बहस
ये
मुद्दआ
Dushyant Kumar
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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परेशाँ
हूँ
बहुत
मैं
ज़िन्दगी
से
गुज़ारा
चल
रहा
है
शा'इरी
से
Sarthak Bechen
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तुम्हें
मुझ
सेे
जुदा
होना
पड़ेगा
छुपा
नज़रें
हमें
रोना
पड़ेगा
ज़माना,
बीज
नफ़रत
बो
रहा
है
मुहब्बत
का
हमें
बोना
पड़ेगा
नहीं
आती
मुझे
अब
नींद
लेकिन
तेरे
दीदार
को
सोना
पड़ेगा
मैं
हूँ
बेचैन
ये
सबको
ख़बर
है
तुम्हें
भी
चैन
अब
खोना
पड़ेगा
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Sarthak Bechen
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ग़ज़ल
कैसे
में
कह
पाता,
मुहब्बत
की
नहीं
उसने
गले
कैसे
मैं
लग
जाता,
इज़ाज़त
दी
नहीं
उसने
मैं
ये
दिल
दे
के
आया
ख़ूब-सूरत
उस
हसीना
को
भले
बेचैन
के
दिल
की
हिफ़ाज़त
की
नहीं
उसने
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Sarthak Bechen
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मिरी
इस
आँख
में,
इक
ख़्वाब
ये
है
पिता
मेरे,
मुझे
शाइर
कहेंगे
Sarthak Bechen
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मुहब्बत,
इश्क़,
ये
सब
अब
कहाँ
होता
है,
बोतल
दो
नशा
करके,
जहाँ
मेरा,
जहाँ
लगता
है,
बोतल
दो
नहीं
पीता
अकेले
मैं,
बहुत
हैं
प्यार
के
मारे
मिरे
जैसा
शराबी
वो,
वहाँ
रहता
है,
बोतल
दो
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Sarthak Bechen
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